नई दिल्ली. इन दिनों देश में बढ़ते लीग की वजह से क्रिकेट खेल टीवी पर छाया रहता है ऐसे सोचिए, आप टीवी पर क्रिकेट मैच देख रहे हों और अचानक मैदान पर कोई खिलाड़ी बिना किसी गंभीर खून-खराबे के अचानक सांस लेना बंद कर दे और बेहोश होकर गिर पड़े. वैसे तो क्रिकेट मैदान पर कई हैरान करने वाली घटनाएं होती रही है पर जो कुछ 47 साल पहले ऑस्ट्रेलिया में हुआ वो दोबारा कभी नहीं हुआ और ना हो तो ही अच्छा है.
क्रिकेट के इतिहास में बाउंसर से चोट लगने की कई दुखद कहानियां दर्ज हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी खिलाड़ी की जान सिर्फ इसलिए जाते-जाते बची क्योंकि वह मैदान पर मजे से चुइंगम चबा रहा था. जी हां, साल 1979 में एशेज सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज रिकी डार्लिंग के साथ एक ऐसा ही वाकया हुआ था, जिसने कुछ ही सेकंड में पूरे खेल जगत की सांसें अटका दी थीं.
खौफनाक बाउंसर और थमी हुई सांसें
यह घटना 1978-79 की एशेज सीरीज के 5वें टेस्ट मैच के दौरान एडिलेड ओवल के मैदान पर घटी थी. इंग्लैंड के खतरनाक तेज गेंदबाज बॉब विलिस अपनी आग उगलती गेंदों से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की परीक्षा ले रहे थे. क्रीज पर मौजूद थे ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज रिकी डार्लिंग जो अपनी बेफिक्र बल्लेबाजी और मुंह में चुइंगम चबाने के अंदाज के लिए जाने जाते थे. मैच के दौरान बॉब विलिस ने एक तेजतर्रार शॉर्ट-पिच गेंद बाउंसर फेंकी, जो तेजी से अंदर की तरफ आई. रिकी डार्लिंग गेंद की लाइन को भांप नहीं पाए और गेंद सीधे आकर उनके सीने पर जोर से लगी. गेंद का प्रहार इतना जोरदार था कि डार्लिंग वहीं पिच पर गिर पड़े. लेकिन असली खतरा गेंद की चोट नहीं, बल्कि कुछ और था.
जब गले में फंस गया ‘काल’
जैसे ही गेंद सीने पर लगी, डार्लिंग के मुंह में मौजूद चुइंगम उनके गले की नली (विंडपाइप) में जाकर फंस गई. इस झटके के कारण उनकी सांस पूरी तरह से रुक गई। कुछ ही सेकंड के भीतर डार्लिंग का शरीर नीला पड़ने लगा और वे पिच पर बेसुध हो गए. मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और अंपायरों को तुरंत समझ आ गया कि स्थिति बेहद नाजुक और जानलेवा है क्योंकि बल्लेबाज सांस नहीं ले पा रहा था.
विरोधी खिलाड़ी और अंपायर बने ‘देवदूत’
ऐसे खौफनाक माहौल में इंग्लैंड के स्पिनर जॉन एम्बुरी बिना वक्त गंवाए सबसे पहले रिकी डार्लिंग की मदद के लिए दौड़े. डार्लिंग को सांस न आते देख एम्बुरी ने सूझबूझ दिखाई और उनके सीने पर तेजी से जोर का मुक्का मारा. इस तेज झटके की वजह से गले में फंसी चुइंगम थोड़ी ढीली हुई. ठीक उसी समय मैदान पर मौजूद अंपायर मैक्स ओ’कोनेल ने तुरंत डार्लिंग को माउथ-टू-माउथ रीससिटिटेशन देना शुरू कर दिया. दोनों पुरुषों की इस त्वरित और सूझबूझ भरी प्रतिक्रिया ने मैदान पर एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया. अगर एम्बुरी और अंपायर ने कुछ सेकंड की भी देरी की होती, तो डार्लिंग के दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती और मैदान पर एक बड़ा हादसा हो जाता.
अस्पताल में खुली आंखें, अगले दिन फिर की बल्लेबाजी
घटना के तुरंत बाद रिकी डार्लिंग को मैदान से एम्बुलेंस के जरिए सीधे अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल पहुंचने के कई घंटों बाद उन्हें होश आया. हालांकि, कहानी का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा इसके बाद शुरू होता है. उस दौर के क्रिकेटर्स बेहद मजबूत मानसिकता के होते थे. अस्पताल से छुट्टी मिलने के ठीक अगले ही दिन, रिकी डार्लिंग वापस मैदान पर आ गए और अपनी अधूरी पारी को 0 रन से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया. यह घटना आज भी क्रिकेट जगत को याद दिलाती है कि खेल के मैदान पर लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है. खेल के दौरान चुइंगम चबाना भले ही स्टाइल स्टेटमेंट लगे, लेकिन रिकी डार्लिंग की यह आपबीती सिखाती है कि यह छोटी सी आदत किसी की जान पर भी बन सकती है.


