Motivational Quotes: ‘क्रिकेट का भगवान’ सचिन तेंदुलकर के प्रेरणादायक कोट्स जो बदल सकते हैं आपकी ज़िंदगी!


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Sachin Tendulkar’s Motivational Quotes: सचिन तेंदुलकर को दुनिया के महानतम क्रिकेटरों में गिना जाता है. वह केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावना हैं. क्रिकेट के मैदान पर उनका सफर मेहनत, अनुशासन और जुनून की मिसाल है.

भारत सरकार ने उनको भारत रत्न और पद्म विभूषण जैसे सर्वाेच्च सम्मानों से भी नवाजा है.. सचिन के नाम टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है.

मैदान में खेल के अलावा सचिन का जीवन अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है. उनके विचार और व्यवहार आज भी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के मिसाल है. आइए जानते हैं कि सचिन के कुछ मोटिवेशनल कोट्स-

जीत और हार खेल का हिस्सा

सचिन कहते हैं कि अगर आप मैदान पर ईमानदारी से खेलते हैं, तो नतीजे अपने आप आपके पक्ष में आते हैं. उनके अनुसार जीत और हार खेल का हिस्सा है, लेकिन कोशिश और समर्पण कभी कम नहीं होना चाहिए.

सोच, संघर्ष और जीत का मंत्र

सचिन तेंदुलकर मानते हैं कि जीत की नींव मैदान पर नहीं, दिल में बनती है. उनका कहना है कि क्रिकेट खेलने से पहले आपके भीतर मजबूत सोच और आत्मविश्वास होना चाहिए. जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, वैसे-वैसे आप रन बनाना और विकेट लेना सीखते हैं.

वह कहते हैं कि उन्हें हारना बिल्कुल पसंद नहीं है. क्रिकेट उनका पहला प्यार है और मैदान में उतरते ही वह पूरी तरह खेल में डूब जाते हैं. जीतने की भूख हमेशा उन्हें आगे बढ़ाती रही. हालांकि उन्होंने यह भी सीखा कि हर मैच में चीजें आपके हिसाब से नहीं होतीं. ऐसे में शांत रहना और अपनी सहज प्रवृत्ति पर भरोसा करना सबसे जरूरी होता है.

मैदान पर आत्मविश्वास भी जरूरी

सचिन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ मैदान पर मौजूद रहना काफी नहीं होता. आपकी बॉडी लैंग्वेज, आत्मविश्वास और उपस्थिति भी बहुत मायने रखती है. उन्होंने वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विव रिचर्ड्स को इसका सबसे बड़ा उदाहरण बताया.

उनके मुताबिक मैच असल में बहुत पहले शुरू हो जाता है. तैयारी, मानसिक संतुलन और फोकस ही खिलाड़ी को बड़ा बनाते हैं. गेंद पर प्रतिक्रिया करने के लिए उन्हें कई बार आधे सेकंड से भी कम समय मिलता था. ऐसे में सोचने का समय नहीं होता, सिर्फ अभ्यास और अनुभव ही काम आता है.

इंसानियत और सेवा सबसे पहले

सचिन तेंदुलकर सिर्फ महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी हैं. उन्होंने अपने पिता से इंसानियत और सेवा के संस्कार सीखे. वह बताते हैं कि उनके पिता जरूरतमंदों की हमेशा मदद करते थे.

उनके घर आने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे वह डाकिया ही क्यों न हो, खाली हाथ नहीं लौटता था. सचिन मानते हैं कि अगर समाज सेवा को स्वार्थ या राजनीति से जोड़ दिया जाए, तो उसका असर खत्म हो जाता है. उनके लिए सेवा एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी है, न कि दिखावे का माध्यम. वह चाहते हैं कि उनके काम को राजनीति से दूर रखा जाए.

परिवार जीवन का अहम हिस्सा

परिवार उनके जीवन का अहम हिस्सा है. सचिन कहते हैं कि जैसे क्रिकेट को समय देना जरूरी है, वैसे ही परिवार के साथ समय बिताना भी उतना ही जरूरी है. वह मैदान पर अपने छह घंटे पूरी गंभीरता से खेलना चाहते हैं और उसके बाद नतीजे को स्वीकार करते हैं.

उनका मानना है कि अगर एक खिलाड़ी पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है, तो जब चीजें गलत हों, तो आलोचना भी उसी खिलाड़ी की होनी चाहिए. जिम्मेदारी से भागना उनके स्वभाव में नहीं है.

नई पीढ़ी के लिए सचिन का संदेश

सचिन तेंदुलकर युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हैं. उनका सबसे मशहूर संदेश है. अपने सपनों का पीछा कभी मत छोड़ो, क्योंकि सपने सच होते हैं. लेकिन साथ ही वह यह भी कहते हैं कि शॉर्टकट अपनाने से बचना चाहिए.

वह मानते हैं कि अगर आप विनम्र बने रहते हैं, तो खेल खत्म होने के बाद भी लोग आपको याद रखते हैं. एक अभिभावक के रूप में उन्हें यह ज्यादा खुशी होगी कि लोग कहें कि सचिन एक अच्छा इंसान है, न कि सिर्फ महान क्रिकेटर.

सचिन यह भी कहते हैं कि लोग जब आप पर पत्थर फेंकें, तो उन्हें मील का पत्थर बना देना चाहिए. आलोचना को अपनी ताकत बनाना ही असली सफलता है. दबाव की स्थिति में खुद को स्थिर रखना, साफ सोच रखना और अपनी प्रवृत्ति पर भरोसा करना ही जीत की कुंजी है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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