आज के तेजी से बदलते दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण कई महिलाएं अपने पति को प्यार से ‘Hubby’ कहकर बुलाती हैं. अधिकतर शादीशुदा महिलाओं को यह एक मॉर्डन, क्यूट और रोमांटिक संबोधन लगता है.
लेकिन ऐसे में सवाल यह है कि, क्या हमें बिना मतलब जानें किसी भी शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए? जानिए कथावाचक शिवम साधक महाराज से इसके पीछे का तर्क?
Hubby भारतीय परंपरा का हिस्सा नहीं?
“हबी” कोई भारतीय परंपरा या हिंदी से निकला शब्द नहीं है. यह मूल रूप से अरबी भाषा का शब्द है, जिसका इस्तेमाल मुस्लिम समाज में होता है और वहां इसका मतलब होता है, ‘प्रिय’ या डार्लिंग, यानी यह शब्द विदेशी है.
यह शब्द भारतीय भाषिक परंपरा का हिस्सा नहीं है. इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन समस्याएं तब शुरू होती हैं, जब लोग इस शब्द का बिना अर्थ, बिना संदर्भ और बिना सांस्कृतिक समझ के अपनाते हैं.
कथावाचक शिवम साधक से जानें इसके पीछे का तर्क?
कथावाचक शिवम साधक का कहना है कि, बिना सोचे-समझे विदेश शब्दों को अपनाकर हम धीरे-धीरे अपनी ही भाषिक पहचान को खो रहे हैं. आज हबी हैं, कल कुछ और होगा, और परसों हम खुद भूल जाएंगे कि, हमारी भाषा में क्या शब्द थे.
वैसे भी सनातन परंपरा में पति के लिए सैकड़ों संबोधन पहले से ही मौजूद हैं, जैसे कि- पति, स्वामी, प्राणनाथ, जीवनसाथी, अर्धांग, प्रियतम आदि. ये शब्द केवल रोमांटिक ही नहीं, बल्कि सम्मान, जिम्मेदारी और दायित्व भाव से भी भरे हैं. इसके मुकाबले हबी केवल एक ट्रेंड है, जिसका न कोई भारतीय संदर्भ है और न ही सांस्कृतिक जुड़ाव.
मॉर्डन कल्चर के साथ अपनी सांस्कृति का भी करें सम्मान
आज के समय का कड़वा सच ये भी है कि, लोग मॉर्डन बनने के चक्कर में अक्सर अपनी जड़ों को हीन समझने लगते हैं. उन्हें लगता है कि, अंग्रेजी या विदेश शब्द बोलने से वे अधिक कूल, स्मार्ट और काफी प्रोग्रेसिव भी दिखेंगे. जबकि असल में यह प्रोग्रेस नहीं, बल्कि सांस्कृतिक असुरक्षा की ओर इशारा करता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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