एपस्टीन फाइल्स के बीच सत्ता की दौड़ में शबाना महमूद, जानिए कहां कर चुकी हैं पढ़ाई-लिखाई?
एपस्टीन फाइल्स ने दुनिया की राजनीति में ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी आंच कई देशों तक पहुंच चुकी है. इन फाइल्स में सामने आए खुलासों ने ताकतवर नेताओं और बड़े चेहरों की असली तस्वीर दुनिया के सामने रख दी है. अमेरिका से लेकर यूरोप तक सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
एपस्टीन फाइल्स का असर अब ब्रिटेन की राजनीति पर भी साफ नजर आ रहा है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर भी इन फाइल्स की आंच पहुंची है. कहा जा रहा है कि उनकी कुर्सी खतरे में है. सत्ताधारी लेबर पार्टी के लिए हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं. पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह दबाव बढ़ रहा है, जिससे देश की राजनीति में उठापटक तेज हो गई है.
लेबर पार्टी की पकड़ कमजोर होती दिखी
इन खुलासों के बाद ऐसा लगने लगा है कि लेबर पार्टी के हाथ से देश की कमान फिसल सकती है. विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और जनता के बीच भी सवाल उठने लगे हैं. यही वजह है कि ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री की चर्चा तेज हो गई है और कई नाम सामने आने लगे हैं.
नए पीएम की रेस में आगे शबाना महमूद
इसी बीच ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री की रेस में शबाना महमूद का नाम सबसे आगे चल रहा है. अगर वह इस रेस में जीत हासिल करती हैं, तो वह ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री बनेंगी. यह न सिर्फ ब्रिटेन बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है.
कौन हैं शबाना महमूद?
शबाना महमूद इस समय लेबर पार्टी में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक हैं. वह पेशे से वकील हैं और राजनीति में भी लंबा अनुभव रखती हैं. 45 साल की शबाना महमूद को एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में जाना जाता है. वह पार्टी के भीतर अपने साफ और मजबूत विचारों के लिए पहचानी जाती हैं. शबाना महमूद का जन्म ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम महमूद अहमद और मां का नाम जुबैदा है. उनका परिवार मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से जुड़ा रहा है. ब्रिटेन में पली-बढ़ी शबाना ने अपनी पहचान मेहनत और काबिलियत के दम पर बनाई है.
कहां से की पढ़ाई?
शबाना महमूद ने अपनी शुरुआती पढ़ाई ब्रिटेन में ही की. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने साल 2002 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिंकन कॉलेज से लॉ की डिग्री हासिल की. इसके बाद साल 2003 में उन्होंने बैरिस्टर बनने के लिए इन्स ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ से बार वोकेशनल कोर्स किया. पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि कानून और समाज से जुड़े मुद्दों में बढ़ने लगी थी.
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