Video: 24 घंटे में पलटा गलगोटिया यूनिवर्सिटी का बयान, लग रहे आरोपों पर पल में बदल गईं यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, वीडियो वायरल


ग्रेटर नोएडा की यूनिवर्सिटी गलगोटिया रोबोट के फर्जी दावे को लेकर इस वक्त लोगों के निशाने पर है, खबर है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर निकालने की भी तैयारी हो चुकी है. लेकिन अब सोशल मीडिया पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो एक दिन पहले किए गए अपने दावों से साफ मुकरती दिखाई दे रही हैं. वीडियो देखने के बाद यूजर्स भी कह रहे हैं कि झूठ बोलने की भी हद होती है.

चीन के रोबोट को अपना बताकर बटोरी थी सुर्खियां

दरअसल, सोशल मीडिया पर दिल्ली में हो रहे एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का कथित रोबोट काफी चर्चा में है. मजेदार बात ये है कि जिस रोबोट को यूनिवर्सिटी ने अपना बताकर सुर्खियां बटोरी थीं वो असल में उसका है ही नहीं. बावजूद इसके मीडिया से बात करते हुए यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ने रोबोट को लेकर दावा किया था कि यह खास रोबोट उन्हीं की यूनिवर्सिटी लैब में बनाया गया है और यूनिवर्सिटी ने एआई पर अब तक 350 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च भी कर दिए हैं. लेकिन जैसे ही यूनिवर्सिटी की पोल खुली वैसे ही यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अपने दावों से साफ मुकरती नजर आईं.

पोल खुलने पर क्या बोलीं प्रोफेसर

जब मीडिया ने पोल खुलने के बाद उनसे सवाल किया तो प्रोफेसर नेहा सिंह बोलीं….” गलगोटिया यूनिवर्सिटी बहुत ही रिस्पॉन्सिबल संस्थान है. हमारी क्यूएस रैंकिंग अगर आप देखें तो वो केवल क्वालिटी एजुकेशन पर ही नहीं बल्कि हमारी लेगेसी और वैल्यू सिस्टम से भी है. हमने कभी ये क्लेम नहीं किया कि हमने कुछ मैन्युफैक्चर किया है जो हमने नहीं किया. इसके बाद जब लोग उनसे पूछते हैं कि कल तो आपने डवलपमेंट कहा था तो प्रोफेसर कहती हैं कि डवलपमेंट का मतलब किसी चीज को डिजाइन करना या मेन्युफेक्चरर करना नहीं होता.

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यूजर्स ने लगा डाली यूनिवर्सिटी की क्लास

वीडियो को सोशल मीडिया पर अलग अलग प्लेटफॉर्म से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…जैसा नाम है वैसा ही काम चल रहा है. एक और यूजर ने लिखा…झूठ बोलने की भी हद होती है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे, ऐसे संस्थान केवल दिखावे के लिए होते हैं, पढ़ाई और रिसर्च में ये जीरो हैं.

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