नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया. ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि उसने चीन में बनी एक रोबोटिक डॉग मशीन को अपने छात्रों से जरिए विकसित बता कर प्रदर्शित किया. सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद यूनिवर्सिटी को सफाई देनी पड़ी और माफी भी मांगनी पड़ी. हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में घिरी हो. इससे पहले भी छात्र प्रदर्शन, फीस विवाद और कैंपस में मारपीट जैसी घटनाओं को लेकर इसका नाम चर्चा में रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी की शुरुआत कब हुई और किसने की थी, कब-कब ये विवादों में रही.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की शुरुआत कब हुई और किसने की थी?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी. इसके संस्थापक सुनील गलगोटिया हैं. सुनील गलगोटिया ने अपने करियर की शुरुआत एक पब्लिकेशन व्यवसाय से की थी. उनका परिवार नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक किताबों की दुकान चलाता था. वर्ष 1980 में उन्होंने गलगोटिया पब्लिकेशंस नाम से अपना प्रकाशन शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने किताब छापने के लिए करीब 9000 रुपये का कर्ज लिया था. बाद में उन्हें विदेश में पढ़ाई से जुड़ी परीक्षाओं की मशहूर किताबों को प्रकाशित करने का अधिकार मिला, जिससे उनका कारोबार तेजी से बढ़ा.
शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने साल 2000 में 40 छात्रों के साथ गलगोटिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की शुरुआत की. उसी वर्ष गलगोटिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी भी शुरू हुआ. इन संस्थानों की सफलता के बाद 2011 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई. आज ग्रेटर नोएडा में 52 एकड़ में फैला इसका कैंपस है.
कब-कब ये विवादों में रही?
1. एआई समिट में रोबोट डॉग विवाद – 2026 में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूनिवर्सिटी ने एक रोबोट डॉग प्रदर्शित किया. आरोप लगा कि यह रोबोट चीन की कंपनी का बना हुआ था, लेकिन इसे यूनिवर्सिटी ने विकसित बताया गया. मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई. यूनिवर्सिटी ने सफाई देते हुए कहा कि एक प्रतिनिधि ने तकनीकी जानकारी ठीक से समझे बिना गलत बयान दे दिया था. बाद में यूनिवर्सिटी ने कार्यक्रम स्थल से अपना स्टॉल हटा लिया और माफी मांगी. इस घटना ने यूनिवर्सिटी की साख पर सवाल खड़े किए और देश की छवि को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई.
2. 2024 का राजनीतिक विवाद – साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ छात्र नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते दिखाई दिए. उन्होंने इनहेरिटेंस टैक्स और अन्य मुद्दों को लेकर नारे लगाए. बताया गया कि प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्र खुद को गलगोटिया यूनिवर्सिटी का छात्र बता रहे थे. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि कुछ छात्रों को प्रदर्शन के मुद्दे की पूरी जानकारी भी नहीं थी. बाद में यह दावा किया गया कि उन्हें अटेंडेंस के नाम पर प्रदर्शन में लाया गया था. इस घटना ने भी यूनिवर्सिटी को विवादों में ला दिया.
3. कोविड-19 के समय फीस विवाद – साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब यूनिवर्सिटी पर छात्रों से अगले सत्र की फीस जमा करने का दबाव बनाने का आरोप लगा. कई छात्रों ने इसका विरोध किया और शिकायत भी दर्ज कराई, उस कठिन समय में फीस को लेकर सख्ती बरतने पर यूनिवर्सिटी की काफी आलोचना हुई.
4. कैंपस में मारपीट का मामला – साल 2024 में यूनिवर्सिटी के कैंपस में छात्रों के दो समूहों के बीच मारपीट का वीडियो वायरल हुआ. बताया गया कि क्लास में आगे-पीछे बैठने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो बाद में झगड़े में बदल गया. यह घटना भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही.
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