सफेद, पीली, हरी, लाल और काली प्लेटें सबसे आम हैं. ये कलर कोड आईडेंटिटी, सेफ्टी, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सरकारी प्रोटोकॉल के लिए बनाए गए हैं. सफेद प्लेट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, क्योंकि ज्यादातर वाहन निजी होते हैं. इन रंगों का सही ज्ञान होने से गलतफहमी, नियम उल्लंघन और ठगी से बचा जा सकता है. कुल मिलाकर, ये प्लेटें भारत की सड़कों को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. आइए, अलग-अलग नंबर प्लेट के बारे में जानते हैं.
व्हाइट नंबर प्लेट
सफेद रंग की नंबर प्लेट पर काले अक्षर लिखे होते हैं. ये भारत में सबसे आम और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली प्लेट है. प्राइवेट व्हीकल्स के लिए होती है. जैसे पर्सनल कार, बाइक या स्कूटर. इन वाहनों का उपयोग सिर्फ व्यक्तिगत या पारिवारिक कामों के लिए किया जा सकता है, व्यावसायिक रूप से (जैसे किराए पर यात्रियों को ले जाना या माल ढोना) इसे यूज करना इलीगल है. अगर कोई सफेद प्लेट वाली गाड़ी कमर्शियल यूज में पकड़ी जाती है, तो जुर्माना लग सकता है.
Green Number Plate
ग्रीन नंबर प्लेट
हरी रंग की नंबर प्लेट इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए विशेष रूप से बनाई गई है. इसमें सफेद अक्षर प्राइवेट इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए और पीले अक्षर कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों (जैसे इलेक्ट्रिक टैक्सी) के लिए होते हैं. सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए 2019-20 से ये नियम लागू किया है. हरी प्लेट वाली गाड़ियां जीरो एमिशन वाली होती हैं, इसलिए इन्हें कई राज्यों में टैक्स छूट, फ्री पार्किंग या स्पेशल लेन जैसी सुविधाएं मिलती हैं.
रेड नंबर प्लेट
लाल रंग की नंबर प्लेट दो मुख्य प्रकार की होती है। पहली टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन वाली, जिसमें सफेद अक्षर होते हैं. ये नए वाहनों पर तब लगाई जाती है, जब परमानेंट नंबर नहीं मिला होता है. दूसरी, उच्च सरकारी पदाधिकारियों की गाड़ियां रेड नंबर प्लेट वाली होती हैं. इसमें कभी-कभी सिर्फ भारत का एम्ब्लम होता है. ये प्लेट प्रोटोकॉल और सुरक्षा का प्रतीक है. आम नागरिकों को ये प्लेट नहीं मिलती.
Yellow Number Plate
पीली नंबर प्लेट
पीली रंग की नंबर प्लेट पर काले अक्षर लिखे होते हैं. ये पूरी तरह कमर्शियल वाहनों के लिए है. जैसे टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, बस, ट्रक या गुड्स कैरियर. इन वाहनों को यात्रियों या माल को किराए पर ढोने की अनुमति होती है. ड्राइवर को कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी है. पीली प्लेट वाली गाड़ियां ज्यादा टैक्स देती हैं और सख्त नियमों (जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट) के अधीन होती हैं.
काली नंबर प्लेट
काली रंग की नंबर प्लेट पर पीले अक्षर लिखे होते हैं. ये मुख्य रूप से सेल्फ-ड्राइव रेंटल वाहनों के लिए होती है, जैसे Zoomcar, Revv, या अन्य ऐप-बेस्ड किराए की कारें, जहां ग्राहक खुद ड्राइव करता है. ये कमर्शियल कैटेगरी में आती है लेकिन सामान्य टैक्सी से अलग होती हैं, क्योंकि इसमें ड्राइवर नहीं होता. कुछ लग्जरी होटल ट्रांसपोर्ट या स्पेशल रेंटल सर्विस में भी इस्तेमाल होती है.
प्लेट का कलर बदला, तो जुर्माना होगा
ये कलर कोड मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अनिवार्य हैं और HSRP (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) के साथ लागू होते हैं. इसमें टेम्पर-प्रूफ फीचर्स और इंडिया का लोगो होता है. गलत रंग की प्लेट लगाने या गलत उपयोग पर भारी जुर्माना और वाहन जब्ती हो सकती है.
कुल मिलाकर, ये प्लेटें न सिर्फ पहचान हैं बल्कि सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कानूनी व्यवस्था को मजबूत बनाती हैं. भविष्य में और बदलाव आ सकते हैं, जैसे BH सीरीज या नई EV पॉलिसी, लेकिन रंगों का बेसिक मतलब वही रहेगा. इससे आम आदमी को ट्रैफिक नियम समझने और जागरूक रहने में मदद मिलती है.
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