OpenAI के CEO Sam Altman ने कहा कि AI मॉडल की ऊर्जा खपत पर बहस करते समय इंसानों की शिक्षा और विकास में लगने वाले संसाधनों को भी समझना चाहिए. उन्होंने AI को लोकतांत्रिक बनाने की वकालत की.

सैम ऑल्टमैन.
उन्होंने आसान शब्दों में समझाया कि एक इंसान को समझदार बनने में लगभग 20 साल लग जाते हैं. इस दौरान खाना, पढ़ाई, देखभाल और बाकी जरूरतों पर काफी संसाधन खर्च होते हैं. यानी अगर AI की ट्रेनिंग में लगने वाली बिजली पर सवाल उठते हैं, तो हमें यह भी देखना चाहिए कि इंसानों की शिक्षा और विकास में कितनी ऊर्जा लगती है.
भारत बन सकता है AI का सबसे बड़ा बाज़ार
सैम ऑल्टमैन भारत में AI Impact Summit के लिए आए थे. यहां उन्होंने कहा कि भारत इस समय AI अपनाने के मामले में दुनिया में आगे चल रहा है. उनके मुताबिक, भारत सिर्फ AI का इस्तेमाल ही नहीं कर रहा, बल्कि इस टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. आने वाले समय में भारत AI के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन सकता है.
उन्होंने एक और अहम बात कही. ऑल्टमैन का मानना है कि AI की ताकत अगर किसी एक कंपनी या देश के हाथ में सिमट जाए, तो यह खतरनाक हो सकता है. उनका कहना है कि AI को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहिए. भले ही इसके साथ कुछ चुनौतियां आएं, लेकिन लोगों को सशक्त बनाना ज्यादा जरूरी है.
OpenAI की रणनीति भी यही है. कंपनी ‘iterative deployment’ का तरीका अपनाती है. इसका मतलब है कि AI टूल्स को धीरे-धीरे लोगों के बीच लाया जाए, ताकि वे उन्हें इस्तेमाल करके सीख सकें, भले ही वे पूरी तरह परफेक्ट न हों. कुल मिलाकर, सैम ऑल्टमैन का संदेश साफ है- AI से डरने की बजाय उसे समझदारी से लोगों के हाथ में देना चाहिए.
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Afreen Afaq has started her career with Network 18 as a Tech Journalist, and has more than six years experience in ‘Mobile-Technology’ beat. She is a high-performing professional with an established and proven …और पढ़ें
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