Sanju Samson: प्लेइंग-11 से बाहर होने पर बेचैन थे संजू सैमसन, फिर कैसे हुई वापसी और बन गए हीरो?


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Sanju Samson: संजू सैमसन ने बताया है कि वह प्लेइंग-11 से बाहर होने के बाद बेचैन हो गए थे. टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबलों में ताबड़तोड़ बैटिंग से टीम इंडिया को खिताब दिलाने वाले इस बल्लेबाज ने बताया कि साथी खिलाड़ियों ने ही उनके फॉर्म में लौटने और टीम में कमबैक करने में अहम भूमिका निभाई.

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प्लेइंग-11 से बाहर होने पर संजू सैमसन ने क्या किया?

नई दिल्ली. भारतीय ओपनर संजू सैमसन ने प्लेइंग-11 से बाहर रहने के बारे में खुलकर बात की है. उन्होंने बताया है कि जब वह प्लेइंग-11 से बाहर थे तो वह पूरी तरह टूट चुके थे. सैमसन ने फॉर्म में लौटने पर भी बात की. उन्होंने कहा कि टीम की जरूरतों को पूरा करने की उनकी चाहत ने उन्हें टी20 वर्ल्ड कप के दौरान प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने में मदद की. संजू ने ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव’ में कहा, ‘मैं ऐसा इंसान हूं जो खुद के लिए अच्छा करने के बजाय दूसरों के लिए अच्छा करना पसंद करता है. न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में मैं टीम में जगह बनाने के लिए अपने ही साथियों से मुकाबला कर रहा था और मुझे ये बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था.’ संजू ने माना कि प्लेइंग इलेवन में जगह न मिलने से वह पूरी तरह टूट गए थे.

उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत बेचैन था क्योंकि मुझे पता था कि मेरा सपना अब बहुत करीब है. लेकिन टीम अलग-अलग कॉम्बिनेशन आजमा रही थी, तो मैं टीम में हूं या नहीं, यही सोच रहा था.’ संजू ने कहा, ‘मैं पूरी तरह टूट गया था क्योंकि मेरा सपना वर्ल्ड कप जीतना था. और मैं तो टीम की प्लेइंग इलेवन में भी नहीं था. इसलिए मैं पांच-छह दिन सबसे दूर चला गया और खुद को फिर से संभालना शुरू किया.’

प्लेइंग-11 से बाहर होने पर संजू सैमसन ने क्या किया?

उन्होंने कहा, ‘मैंने खुद को तैयार करना शुरू कर दिया था, ये जानते हुए कि आपको कभी नहीं पता कि खेल आपको क्या देगा.’ संजू को ये मौका चेन्नई में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के सुपर आठ मैच में मिला. 31 साल के संजू ने ज्यादा रन तो नहीं बनाए, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने भरोसा दिया कि वह अगले चार मैचों में प्लेइंग इलेवन में रहेंगे.

सैमसन ने कहा, ‘मुझे पता था कि टीम मैनेजमेंट को मुझ पर भरोसा है. जिम्बाब्वे मैच से ही, हमें चार में से चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी. तभी से मेरे लिए चीजें पॉजिटिव हो गईं और मैं बहुत जोश में आ गया.’ उनके साथी ओपनर अभिषेक शर्मा थोड़े निराश थे कि वह वर्ल्ड कप में वैसी पारियां नहीं खेल पाए जैसी उनसे उम्मीद थी, इसकी एक वजह पेट का इंफेक्शन भी था. लेकिन इस लेफ्ट हैंडेड बल्लेबाज ने फाइनल में अहम अर्धशतक लगाया और टीम की जीत में योगदान देकर बहुत खुश थे. संजू ने कहा, ‘जिस दिन से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, मेरा एक ही सपना था कि देश के लिए खेलूं. और जब आप देश के लिए खेलते हैं तो सबसे बड़ा सपना अपने देश के लिए आईसीसी ट्रॉफी जीतना होता है.’

उन्होंने कहा, ‘शुरुआत वैसी नहीं थी जैसी मैं चाहता था, लेकिन फिर भी मैं खुश था क्योंकि टीम अच्छा कर रही थी और हम मैच जीत रहे थे.’ उन्होंने कहा, ‘मेरा सपना था कि मैं एक दिन वर्ल्ड चैंपियन बनूं. ये सिर्फ एक ट्रॉफी की बात नहीं है, बल्कि ये इस बात पर है कि मैं अपने देश के लिए कितनी ट्रॉफी जीत सकता हूं. मैं इसी सोच के साथ खेलता हूं.’ अभिषेक ने कहा कि उन्हें टॉप ऑर्डर में संजू के साथ बैटिंग करने में बहुत मजा आया. उन्होंने कहा, ‘संजू भाई बहुत समझदार इंसान हैं. बहुत प्यार करने वाले और ख्याल रखने वाले इंसान हैं. जब आपकी टीम में ऐसे खिलाड़ी होते हैं तो आपको लगता है कि कोई है जो आपके पीछे खड़ा है. हमारे लिए संजू सैमसन हमेशा ऐसे ही रहे हैं.’

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Shivam Upadhyay

नवंबर 2025 से नेटवर्क 18 ग्रुप में सब एडिटर के पद पर कार्यरत. पत्रकारिता में 3 साल का अनुभव. जी न्यूज से खेल पत्रकारिता में डेब्यू किया. क्रिकेट के साथ-साथ हॉकी और बैडमिंटन के बारे में भी लिखने में दिलचस्पी. मा…और पढ़ें



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