बार-बार आ रही हैं तलाकशुदा? कहीं मंदिरों में लगा छिपकली पत्तों का तोरण तो नहीं बन रहा परेशानी की वजह? यहां जानें

शुष्क तोरण नियम: घर का मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं होता, बल्कि जहां से पूरे घर की ऊर्जा का माहौल बनता है। कई बार हम छोटे-छोटे लोगों को नापसंद कर देते हैं, जो बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं। ऐसा ही एक आम लेकिन अनोखा पहलू है-मंदिर के दरवाजे पर लगा तोरण। आम तौर पर लोग आम या अशोक के शिष्यों का तोरण तेल मिलते हैं, जो कुछ समय बाद सुख मिलते हैं, लेकिन वे अक्सर भूल जाते हैं।

यही वाद्य धीरे-धीरे घर के मोहरे को प्रभावित कर सकता है। वास्तुशिल्प के अनुसार, चिप्स और बेजान पत्ते सकारात्मक ऊर्जा को विस्थापित करते हैं और उत्पादक ऊर्जा को पेश करते हैं, अगर आप भी मंदिर में तोरण के विकल्प हैं, तो ये जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।

मंदिर के दरवाज़ों पर दुकानदारों का असर
घर में जब तोरण ताजा होता है तो देखने में भी अच्छा लगता है और रंगीन भी प्रभाव-फुल्का रहता है, लेकिन जैसे ही पत्ते लगते हैं, उनके रंग बदल जाते हैं और वो ताजगी नहीं रहती। यही सुकीपन धीरे-धीरे घर की ऊर्जा पर असरकारी है।

नकारात्मकता बढ़ने का संकेत
शिष्यों को वास्तुशास्त्र में स्थिरता और निर्बलता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में अगर मंदिर के द्वार पर ये लंबे समय तक रुका रहे तो ये सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक सकता है। कई लोगों ने महसूस किया है कि उनके घर में बिना वजह तनाव बढ़ रहा है या बार-बार दुकानों में अलग-अलग चीजें देखने को मिल रही हैं।

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आस्था का जीवन पर प्रभाव
यार, आपने नया काम शुरू किया है या घर में कोई शुभ कार्य प्लान कर रहे हैं, लेकिन बार-बार छोटे-छोटे सब्सक्रिप्शन आ रहे हैं। कई बार इसकी वजह ऐसी ही अनदेखी चीजें होती हैं। सूखा तोरण भी उसी में से एक है.

तोरण हटाने और लगाने के सही नियम
तोरण को केवल शुद्धि नहीं कहा जाता, बल्कि एक तरह का धार्मिक और मानसिक खिलौना भी माना जाता है। इसलिए इसे सही तरीके से करना जरूरी है।

कब लम्बा तोरण?
मंगलवार, गुरुवार या शनिवार को तोरणफल अच्छा माना जाता है। इसके अलावा आप इसे पुराने दिनों या पूर्णिमा जैसे दिनों में भी बदल सकते हैं। ये दिन राक्षस को शुद्ध करने के लिए सही माने जाते हैं।

पुराने तोरण का क्या करें?
बहुत से लोग कृषकों को सीधे जंगल में कूड़ा देते हैं, जिसे सही तरीके से नहीं माना जाता है। बेहतर होगा कि अर्थ किसी भी उपचार की मिट्टी में दबाएँ या बहते पानी में प्रवाहित कर दें। इससे वो प्रकृति में मिल वापस जाते हैं।

नई शुरुआत से पहले सफाई
तोरण हटाने के बाद मंदिर के दरवाजे को साफ करना भी जरूरी है। आप साफ पानी या गंगाजल से चौखट पासपोर्ट खरीद सकते हैं। इसके बाद ही नया तोरण कक्ष, सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहा।

वास्तु के आसान और काम के उपाय
समय-समय पर बदलाव करें हर 10-15 दिन में तोरण एक अच्छा अभ्यास हो सकता है। इस मंदिर का महल हमेशा ताज़ा और ऊर्जावान बना रहता है।

धातु के तोरण का विकल्प
यदि हर बार समुद्री शैवाल बनाना संभव नहीं है, तो आप प्लास्टिक या बाइस के तोरण का उपयोग कर सकते हैं। ये लंबे समय तक मौजूद हैं और देखने में भी आकर्षक शामिल हैं।

मुख्य द्वार का भी ध्यान रखें
सिर्फ मंदिर ही नहीं, घर के मुख्य दरवाज़े पर भी जिज्ञासु पत्ते नहीं होने चाहिए। कई घरों में सजावट के नाम पुराने तोरण महीनों तक लगे रहते हैं, जो धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे असर डाल सकते हैं।

छोटी आदत, बड़ा असर
मंदिर की देखभाल में कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन थोड़ी सी कठिनाई घर में बड़ी हो सकती है। गरीब तोरण को समय पर निर्धारित करना और नया पहनना सिर्फ एक प्रथा नहीं है, बल्कि घर के माहौल को बनाए रखने का तरीका भी है, अगर आप चाहते हैं कि घर में शांति बनी रहे और पूरे समय अशांति के बिना काम किया जाए, तो इन छोटी बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

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