आखरी अपडेट:
वरदराज पेरुमल मंदिर: तमिलनाडु के कांचीपुरम को काशी के बारे में बताया जाता है। यहां आपको हर कदम पर मंदिर मिल जाएंगे, अपना महत्व और इतिहास बताना होगा। लेकिन आज हम आपको कांचीपुरम के एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां 40 साल पुरानी भगवान की मूर्ति स्थित है। अब भगवान की प्रतिमा का वर्ष 2059 में भक्तों को दर्शन होगा। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

अरुल्मिगु श्री वरदराज पेरुमल मंदिर: दुनिया के सात सबसे पुराने शहरों में से एक तमिल का कांचीपुरम अपनी संस्कृति के साथ-साथ आस्था के लिए भी मशहूर है। कांचीपुरम में 125 बड़े मंदिर हैं, जो अपना-अपना इतिहास रखते हैं, लेकिन एक ऐसा मंदिर भी स्थापित है, जो कि पूर्व अनुमान 10 में बहुत बड़ा है। हम बात कर रहे हैं वरदराज पेरुमल मंदिर की। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां भगवान के दरबार जलवास पर हैं और अब प्रतिमा वर्ष 2059 में निकाली जाएगी। सिद्धांत यह है कि इस मंदिर में दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर के बारे में खास बातें…
वरदराजा पेरुमल मंदिर का समृद्ध इतिहास
तमिलनाडु के शांत शहर कांचीपुरम में स्थित वरदराजा पेरुमल मंदिर की बाकी तस्वीरें काफी अलग हैं। इस मंदिर का समृद्ध इतिहास और भव्य स्थापत्य कला अद्वितीय है। यहां भगवान विष्णु वरदराजा पेरुमल के रूप में उनकी पत्नी पेरुंदेवी थायर के साथ विराजमान हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना राजा कृष्ण वर्मा के शासनकाल में हुई थी,मह्वाह थामिर-बरानी नदी में स्नान करते समय एक पवित्र पवित्र पत्थर की मूर्ति की खोज की गई थी। इस मंदिर का इतिहास, साहस और रक्षा की कहानियाँ भरी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि राजा कृष्णवर्मा के राज्य पर आक्रमण के बाद उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की थी, जब दैवीय शक्तियों ने राजा की युद्ध में मदद की और आक्रमणकारी सेना को एकजुट किया था।
ऐसे हुआ मंदिर का निर्माण
भगवान विष्णु की कृपा से राजा ने मंदिर का भव्य निर्माण कराया था। अपने आकार और मंदिर की वजह से काफी प्रसिद्ध है, लेकिन भक्तों की आस्था भगवान विष्णु के साथ मंदिर के गर्भगृह में मौजूद सोने और चांदी की छिपकली से भी जुड़ी है। स्थानीय सिद्धांत के अनुसार, दोनों द्वीप समूह के दर्शन से अर्थ (धन) संबंधित समस्या दूर होती है। ये दोनों छिपकलियाँ महर्षि गौतम के शिष्य माने जाते हैं, जो षाप मुक्ति के लिए मंदिर में आये थे।
अबहोगे 2059 में दर्शन
मंदिर की सबसे खास बात है भगवान विष्णु की मूर्ति, जो अभी जलवास पर है। प्रतिमा का निर्माण कलाकारों के पेड़ की लकड़ी से किया गया है, और पानी में साझीदार तक रहने से भी प्रतिमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रतिमा आखिरी बार आनंद सरस सागर से 28 जून 2019 को बाहर गई थी। अब प्रतिमा 2059 में आउटस्टैंड पर। प्रतिमा को बिना किसी सुरक्षा लेप के जलवास दिया जाता है, लेकिन ना तो प्रतिमा फूलती है और ना ही इसमें गुन लगता है। यही कारण है कि भक्तों के बीच भगवान वरदराजा पेरुमल की भी आस्था अधिक है।
लेखक के बारे में

पैरा शर्मा एक अनुभवी धर्म और ज्योतिष विद्वान हैं, जिनमें भारतीय धार्मिक संप्रदाय, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव शामिल है…और पढ़ें
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
