माँ दुर्गा की पूजा कैसे करें घर पर माँ दुर्गा पूजा विधि, नियम और लाभ हिंदी | माँ दुर्गा की पूजा करने का सही तरीका

होमताजा खबरधर्मकहीं आप भी तो गलत तरीकों से नहीं कर रहे हैं दुर्गा पूजा? नोट कर लें ये 5 जरूरी नियम

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माँ दुर्गा की पूजा कैसे करें: विधि-विधान से माँ दुर्गा की पूजा करना केवल एक धार्मिक कर्म कांड नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का माध्यम है। सही दिशा, मंत्र और श्रद्धा के साथ दी गई पूजा का निश्चित रूप से फल मिलता है। जाने-अनजाने में भक्त मां दुर्गा की पूजा में गलतियां कर देते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।

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माँ दुर्गा की पूजा कैसे करें: हिन्दू धर्म में माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और सुरक्षा की देवी माना जाता है। मां दुर्गा की पूजा से हर दिन कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। शास्त्रों में बताया गया है कि पूर्ण सृष्टि में मां दुर्गा से ही ऊर्जा मिलती है, साथ ही ग्रह-नक्षत्र, आकाशगंगा, वायु, प्रकृति आदि क्रीड़ामान भी होते हैं। दुनिया आज जो कुछ भी चल रही है, वह माँ दुर्गा की शक्ति से ही चल रही है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, बहुत से लोगों को नाहाने की वजह से पूजा में कुछ गलतियां कर बताई जाती हैं, ऐसे में पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। यहां जानिए मां दुर्गा की विधि विधान के साथ कैसे करें पूजा.

दुर्गा पूजा का महत्व
धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा से साधक को भय, नकारात्मकता और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। भक्त मानते हैं कि साधू मन से की गई पूजा से पितृत्व है और जीवन का साक्षात्कार करने की शक्ति है। पुरोहितों के अनुसार मां दुर्गा नवशक्ति का प्रतीक हैं और उनके दरबार से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और शांति का वास होता है। कई मृत मूर्तियाँ नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से न केवल मन एकाग्र होती हैं, बल्कि कार्य में सफलता की संभावना भी आधी होती है।

दुर्गा पूजा की सही विधि
सुबह स्नान कर साफ कपड़े और घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। पूजा के लिए एक वस्त्र पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करके माता के मंत्रों का जाप करें। फिर चारों ओर तरह गंगाजल से सीखें. इसके बाद कलश स्थापना करें, जिसमें जल, आम के पत्ते और नारियल शामिल हैं। फिर मां दुर्गा को रोली, चावल (अक्षत), लाल फूल, सिन्दूर और फल आदि पूजा से संबंधित नीहार करें। साथ ही माता को सुहाग का सामान भी निर्वाह करें। इसके अलावा दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करने से भी विशेष फल मिलता है। इसके बाद दीपक और धूप सेंकने की पूजा की जाती है और अंत में आरती कर प्रसाद पूजन शुरू किया जाता है। फिर पूरे परिवार के साथ माता के जयकारे। माँ दुर्गा की पूजा में कन्या पूजन का विशेष महत्व है।

पूजा किस दिशा में करें?
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्गा पूजा का समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना सबसे शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूजा का फल अधिक होता है।

माँ दुर्गा की पूजा के प्रमुख मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
ॐ दुं दुर्गायै नमः
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्यः सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

कब करें पूजा और क्या रखें ध्यान?
पूजा समय मन को शांत और एकाग्र करें। किसी भी प्रकार की दुकान ना करें और श्रद्धा के साथ पूजा करें। साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। माँ दुर्गा की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान की जाती है, लेकिन शुक्रवार और अष्टमी-नवमी तिथि को पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

पराग शर्मामुख्य उपसंपादक

पैरा शर्मा हिंदी न्यूज़18 डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर हैं। वर्तमान धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं। भारतीय धार्मिक ज्योतिष, ज्योतिष शास्त्र, मेडी…और पढ़ें



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