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गौमुख कुंड महादेव मंदिर: भारत में वैसे तो कई मंदिर हैं, जो अपने इतिहास के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है, जो काफी रहस्यमय है। बताया जाता है कि इस मंदिर में प्रकृति सतत् शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। यह पानी कहां से आता है और कहां जाता है, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। आइए जानते हैं राजस्थान में स्थित भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में खास बातें…

गौमुख कुंड महादेव मंदिर: राजस्थान की धरती अपना इतिहास, किलो और वीरता की तस्वीरें के लिए प्राचीन काल से प्रसिद्ध है, वैसे ही यहां की आस्था और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। दफ़्तर में से एक बेहद खस्ता और लोगों को आकर्षित करने वाली जगह चित्तौड़गढ़ किले में स्थित गौमुख कुंड महादेव मंदिर है। यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थान नहीं है, बल्कि ऐसा अनुभव देता है जहां आस्था, प्रकृति और रहस्य एक साथ मिलते हैं। धार्मिक मत के अनुसार, इस मंदिर में दर्शन करने से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और हर संकट से मुक्ति मिल जाती है। आइये जानते हैं राजस्थान के इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में खास बातें…
किले के अंदर का अद्भुत अनुभव
चित्तौड़गढ़ किला वैसे ही भारत का सबसे विशाल और ऐतिहासिक किला माना जाता है। इसकी दीवारों में अनेक युद्धों, बलिदानों और वीरों की गाथाएँ अंकित हैं। लेकिन किले के अंदर एक ऐसी जगह भी है, जो बिल्कुल अलग अनुभव देती है। जब आप किले के भीतर की गहराई में इस मंदिर की ओर स्थित होते हैं, तो आपको धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे दिखाई देता है। शोर-शराबा पीछे छूट गया है और एक शांत, अलौकिक और रहस्यमयी हवा आपका स्वागत करती है।
गौमुख से होता है अभिषेक का अभिषेक
गौमुख कुंड महादेव मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का शिवलिंग है, जिस पर साल भर 12 महीने लगातार जलाभिषेक होता रहता है। यह जल किसी व्यक्ति द्वारा नहीं चढ़ाया जाता है, बल्कि एक पत्थर की संरचना से बना है जिसका आकार मुख के समान है। इसी कारण से इसे गौमुख कहा जाता है। इस पत्थर के मुख से पानी की एक परत लेकिन स्थिर प्रवाह धारा सीधी लिपि पर गिरती रहती है।
पानी कहाँ है कोई पता नहीं
कहा जाता है कि यह जलधारा कभी रुकती नहीं है। सूखी गर्मी हो, ठंड हो या बारिश, यह पानी लगातार बहता रहता है। इसी वजह से लोग इसे सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं मानते, बल्कि इसे आस्था और चमत्कार से जोड़ते हैं। हालाँकि, कई लोग कहते हैं कि यह जल किसी भी तरह से भूमिगत स्रोत से आता है, लेकिन आज तक यह पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है कि यह पानी लगातार कहाँ से आता है और कैसे रहता है।
मंदिर में गहरी शांति
मंदिर तक पहुँचने के लिए किले के अंदर कुछ सीढ़ियाँ और संकरी राहें पार करनी हैं। यह रास्ता थोड़ा कठिन जरूर है, लेकिन जैसे-जैसे आप नीचे उतरते हैं, वैसे-वैसे आपको लगता है कि आप किसी और ही दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं। ऊपर की दुनिया का भाग और किनारा धीरे-धीरे छूट जाता है और एक गहरी शांति आपके आस-पास फैलती है। मंदिर में आपको होगा ऐसा अनुभव, जिसे आप शब्दों में बया नहीं कर पाएंगे।
लेखक के बारे में

पैरा शर्मा हिंदी न्यूज़18 डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर हैं। वर्तमान धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं। भारतीय धार्मिक ज्योतिष, ज्योतिष शास्त्र, मेडी…और पढ़ें
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