2 जून तक जारी नौतपा
नौतपा 25 जून से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाला है। जब सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। इस साल 25 मई को दोपहर 3:27 बजे सूर्यदेव रोहनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और वह इस नक्षत्र में 8 जून तक रहेंगे। इसके बाद वह मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। सूर्यदेव रोहनी नक्षत्र में लगभग 15 दिन तक रहते हैं लेकिन शुरुआती नौ दिन में सूर्य देव की तपिश पृथ्वी पर अधिक होती है, जिससे मौसम में गर्मी बढ़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नौतपा में कुछ खास उपायों के इस्तेमाल से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन कई तरह से बर्बाद हो सकता है? आइए जानते हैं इन शुभ कंपनियों के बारे में.
पीपल का पेड़: ज्योतिषशास्त्र में पीपल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। सिद्धांत यह है कि इसमें भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव का वास होता है। नौतपा में पीपल के पेड़ के प्रयोग से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
शमी का पौधा: शमी को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है और नौतपा में इसे स्थापित करने की सलाह दी जाती है। शमी के जन्म से लेकर कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है और जीवन की नींद कम होती है।
तुलसी का पौधा: सनातन धर्म में तुलसी को माँ लक्ष्मी का रूप माना जाता है। वास्तुशास्त्रियों के अनुसार तुलसी का पौधा नौतपा में अत्यंत शुभ माना जाता है। घर में तुलसी बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
जैतून का पेड़: इनमें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसे बनाने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
केले का पेड़: ज्योतिषाचार्यों के अनुसार केले का पौधा स्थापित करने से भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है। इससे घर में समृद्धि और वैभव बढ़ता है। वहीं चमेली और मोगरा जैसे औषधीय उपचार पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं।
इन पेड़ को भी सजाओ
इसके अलावा नौतपा में नीम, बिल्वपत्र, बरगद, अशोक, इमली और आम के पेड़ों से भी पापों की मुक्ति होती है, जिससे जीवन की समाप्ति होती है। ये उपाय केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यावरण को भी शुद्ध रखते हैं।
उग्र रूप में सूर्यदेव होते हैं
बता दें कि नौतपा के दौरान सूर्यदेव अपने उग्र रूप में होते हैं, जिससे धरती पर गर्मी बढ़ती है, लेकिन यह समय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी कम है। इन अनुमोदित को छोड़कर आप केवल अपने घर को हरा-भरा बना सकते हैं, बल्कि सुख, समृद्धि और सकारात्मकता भी ला सकते हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि नौतपा के दौरान प्रोटोकॉल की नियमित देखभाल और जल निरक्षक करने से शुभ फल और अधिक वृद्धि होती है। धार्मिक दृष्टि से यह समय प्रकृति से जुड़ाव और हरियाली बढ़ाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
