आखरी अपडेट:
चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य ने पति-पत्नी की उम्र के बीच का अंतर बताते हुए एक नीति बनाई है। नीति में कहा गया है कि दोनों के बीच का अंतर चाहे कम हो या ज्यादा, उनका प्रभाव शहरी जीवन पर समान रूप से ही पड़ा। क्योंकि दोनों के बीच का रिश्ता भी एक ही हिसाब से तय होगा क्योंकि भारतीय समाज में विवाह एक पवित्र बंधन है, इसे सात जन्मों का बंधन माना जाता है। चाणक ने पति-पत्नी के बीच आयु अंतर के बारे में सलाह दी है, जो एक सुखी जीवन जीवन के लिए महत्वपूर्ण है…

चाणक्य नीति: जब भी लड़का या लड़की के घर में विवाह की बात चलती है तो सबसे पहले उम्र पूछी जाती है। भारतीय समाज में शादी के लिए लड़के की उम्र कम ही देखते हैं। ब्वॉयफ्रेंड एक साल बड़ा हो या फिर 10 साल, इस पर कोई चर्चा नहीं करता। इसी संदर्भ में आचार्य चाणक्य ने एक नीति में पति-पत्नी के बीच उम्र क्या है का सही अर्थ बताया है। चाणक के विचार आज भी जीवन के लिए मार्गदर्शक माने जाते हैं। उनका मानना था कि पति-पत्नी के बीच सही उम्र का अंतर न केवल ट्रैवल मैचयोरिटी में मिलता है, बल्कि सैद्धांतिक समझ, सम्मान और धैर्य भी मिलता है। जब उम्र का फासला हो तो जीवन के लक्ष्य, सोच और लक्ष्य एक जैसी रहती है, जिससे मज़हब कम होता है और तलाक जैसी विचारधारा से काफी हद तक बचा जा सकता है।

आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि पति-पत्नी के बीच धीरे-धीरे कम रहता है, दोस्त अच्छा रहता है। 3 से 5 साल तक का अंतर दोनों के लिए बेहतर माना जाता है। चाणक्य कहते हैं कि पति-पत्नी के बीच की उम्र का अंतर धीरे-धीरे कम होगा, दोनों के बीच का अंतर बहुत ज्यादा होगा। दोनों एक साथ मिलेंगे, दोनों एक साथ खुशहाल जीवन जिएंगे और दोनों गृहस्थ जीवन को साथ-साथ सीखेंगे। इसलिए शादी के समय उम्र के अंतर पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

चाणक्य नीति में कहा गया है कि पति-पत्नी का शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है। अगर पति-पत्नी के अंतर में उम्र का अंतर बेहद ज्यादा है तो कई तरह के अनुपात का सामना करना पड़ता है। उम्र में ज्यादा अंतर से दोनों के बीच समझ की कमी की वजह से रिश्ता बढ़ेगा और रोज-रोज की लड़ाई से रिश्ता भी टूट जाएगा और बात तलाक तक पहुंच जाएगी। उम्र में अंतर अधिकतर से दोनों को एक दूसरे की भावना को समझने में अधिक परेशानी होती है।
News18 को इस रूप में जोड़ें
Google पर पसंदीदा स्रोत

चाणक ने यह भी बताया है कि किसी भी उम्र में लड़के को कम उम्र में लड़की से शादी नहीं करनी चाहिए अन्यथा शादी ज्यादा लंबे समय तक नहीं करनी चाहिए। उम्र में इतना बड़ा अंतर होने से दोनों के बीच समझ मजबूत नहीं होगी, जिससे गृहस्थ जीवन सही से नहीं चल पाएगा। भारतीय समाज में पारंपरिक रूप से पति-पत्नी की उम्र 3 से 5 साल का अंतर बताया जाता है। समाज में यह आम बात है कि पुत्रियों की उम्र पुत्रों से छोटी होनी चाहिए, भारतीय विवाह इसी प्रकार संरचित हैं। हालाँकि, कभी-कभी आयु का अंतर 10 से 15 वर्ष तक भी हो जाता है।

आज भी भारत में कई ऐसे परिवार हैं, जहां महिलाएं पुरुष से छोटे होते हैं। यानी, दुल्हन की कीमत छोटी होनी चाहिए। कई लोगों का मानना है कि अगर दोनों की उम्र 30 साल है, तो दुल्हन की उम्र 30 साल से कम ही होनी चाहिए। पहले पति-पत्नी की उम्र 6 से 8 साल थी, लेकिन अब धीरे-धीरे यह कम हो रहा है। विज्ञान में इसके लिए अंग्रेजी शब्द ‘कॉपलाइन’ का प्रयोग किया जाता है। इसके अनुसार, जब पुरुष और महिला के शरीर में किराएदार बने रहते हैं तो उनमें यौन संबंध बनाने की क्षमता आ जाती है।

लड़कियों में यह बदलाव लगभग 13 साल की उम्र से दिखता है। वहीं विज्ञान में यह बदलाव 9 से 15 वर्ष की आयु के बीच होता है। इसका अर्थ यह है कि लड़कियों में ये छात्र मित्र वैज्ञानिकों की तुलना में पहले होते हैं। परिणामस्वरूप, वे वैज्ञानिकों की तुलना में कम उम्र में ही शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम हो जाते हैं। हालाँकि, इस ऑनलाइन बदलाव का मतलब यह नहीं है कि महिलाओं या पुरुषों को देर से शादी करनी चाहिए। दुनिया के कई देशों में शादी की न्यूनतम उम्र तय की गई है, यह उम्र 16 से 18 साल के बीच है। हमारे देश में शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल होनी चाहिए।
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

