
सिद्ध है कि चौखट वह स्थान है जहां घर की ऊर्जा, देवी-देवताओं का आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसका कारण यह है कि इसे सामान्य स्थान नहीं बल्कि एक पवित्र सीमा रेखा माना गया है। आइए जानते हैं कि ज्योतिष, पौराणिक कथाएं और वास्तु शास्त्र के चौखट का क्या महत्व है और इस स्थान का विशेष सम्मान क्यों किया जाता है।
चौखट को पवित्र स्थान क्यों माना जाता है?
ज्योतिष और सनातन परंपरा के अनुसार घर की चौखट में केवल लकड़ी या पत्थर का हिस्सा नहीं होता। इसे घर के अंदर और बाहर की ऊर्जाओं के बीच का द्वार माना जाता है। यही वह स्थान है जहां से शुभ ऊर्जा, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का आगमन होता है। मान्यता है कि जिस घर की दहलीज साफा-सुथरी और प्रतिष्ठित स्थान पर है, वहां देवी लक्ष्मी की कृपा लंबे समय तक निवास करती है। इसी वजह से कई घरों में सुबह-शाम चौखट पर दीपक जलाने और रंगोली बनाने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
देवकीनंद ठाकुर ने क्या सिखाया?
प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदा ठाकुर के घर की चौखट भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई मणियाँ हैं। उनका कहना है कि दहलीज पर यह स्थान दिव्य शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार जिस स्थान का संबंध भगवान के अवतार और किसी महत्वपूर्ण दिव्य घटना से हो, वहां अनादर या असावधानी से बचना चाहिए। इसी कारण चौखट पर बैठने की मनही होती है।
भगवान श्रीकृष्ण और चौखट का संबंध
हिरण्यकशिपु के अंत की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार असुर राजा हिरण्यकशिपु ने ऐसी अलंकरण प्राप्त किया था कि उसका वध न तो घर के अंदर हो सकता था और न ही बाहर। न दिन में और न रात में, न किसी मनुष्य द्वारा और न किसी जानवर द्वारा। तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया। उन्होंने हिरण्यकशिपु के घर की चौखट पर अपने भंडारकर से गोधूली बेला में वध कर दिया। चौखट न पूरी तरह से घर के अंदर था और न ही बाहर, इसलिए सज्जा की सभी वस्तुएं निश्फल हो गईं। इसी घटना के बाद देहलीज़ को एक दिव्य और पवित्र स्थान माना जाने लगा। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चौखट पर शिक्षा को पवित्रता के सम्मान के विपरीत माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में चौखट का क्या महत्व है?
ज्योतिष शास्त्र में घर के मुख्य द्वार और चौखट को राहु, केतु और राशि से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को रोकने वाला क्षेत्र माना जाता है। कई ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि घर का प्रवेश द्वार ऊर्जा का मुख्य केंद्र होता है। यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय तक दहलीज पर स्तिथ है या उसे अव्यवस्थित करता है, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। हालाँकि यह सिद्धांत आस्था पर आधारित है, लेकिन कई लोग इसे आज भी चुने हुए से मानते हैं।
शाम के समय वृद्धि क्यों जरूरी है?
धार्मिक सिद्धांत के अनुसार सूर्य के बाद का समय अत्यंत आकर्षक माना जाता है। कहा जाता है कि इसी समय माता लक्ष्मी घर में भ्रमण करती हैं। ऐसे में चौखट पर साइंटिफिक मार्ग में उनका विच्छेद माना जाता है। इसी कारण कई परिवारों को शाम के समय दहलीज पर बैठने, रहने या मिट्टी जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति और धन का प्रवाह बना रहता है।
वास्तु शास्त्र क्या है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार घर का मुख होता है। जिस प्रकार के व्यक्ति का एक ही चेहरा महत्वपूर्ण होता है, उसी प्रकार के घर की चौखट से भी उसकी पहचान होती है। वास्तु विशेषज्ञ की सलाह है कि चौखट को हमेशा साफ रखें, उस पर सामान न रखें और उस स्थान का सम्मान करें। ऐसा करने से पॉजिटिव माहौल बना रहता है और घर में खूबसूरत का मनमोहक नजारा दिखता है।
चौखट पर न आसन की परंपरा सिर्फ एक प्राचीन सिद्धांत नहीं बल्कि धर्म, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र पर विश्वास है। भगवान नारायण की कथा, माता लक्ष्मी के आगमन की सार्थक और सकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांत इस परंपरा को और भी महत्वपूर्ण बताया गया है। लकड़ी कोई इसे आस्था के रूप में माने या सांस्कृतिक विरासत के रूप में, भारतीय परंपरा में चौखट का सम्मान आज भी विशेष स्थान रखता है।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और शर्ते सामान्य सीटू पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 उपयोगकर्ता पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.





