साथ ही सही दिशा में सही घड़ी बनाने से सकारात्मक ऊर्जा की प्रचुरता होती है, अगर आप भी घर में नई घड़ी बनाने की सोच रहे हैं या पुरानी घड़ी की जगह बदलना चाहते हैं, तो पहले जान लें कि वास्तु की किस दिशा में कौन सी घड़ी सबसे शुभ मणि देती है।
वास्तु शास्त्र क्या है?
वास्तुशास्त्र में घर की हर दिशा को अलग-अलग ऊर्जा और संकेत से जोड़ा गया है। ऐसा माना जाता है कि घड़ी समय के साथ-साथ ऊर्जा के प्रवाह को भी प्रभावित करती है। इसलिए उसका रंग, आकार और स्थान सोच-समझकर रखा जाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा को जल तत्त्व और प्राचीन दिशा के मिश्रण को देखा जाता है, जबकि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिशा वाले अग्नि तत्त्व का प्रतिनिधित्व किया जाता है। पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थिरता और पारिवारिक संतुलन से जुड़ी मनी है।
उत्तर दिशा में कैसी घड़ी लगानी चाहिए?
1. नीला, काला और चांदी रंग का हो शुभ
यदि आपके घर की उत्तर दिशा में घड़ी लग रही है तो आप काला, नीला, भूरा या सिल्वर रंग चुन सकते हैं। ये रंग जल तत्व से जुड़े माने जाते हैं और रिश्तों, अवसरों और आर्थिक प्रगति के लिए शुभ माने जाते हैं। हालाँकि, वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में लाल और पीले रंग की घड़ी पहनने से बचना चाहिए। ये रंग अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इस दिशा की ऊर्जा को असंतुलित कर सकते हैं।
गोल आकार की घड़ी की माला सबसे अच्छी होती है
उत्तर दिशा में गोल या सर्कुलर आकार की घड़ी का चलना अच्छा माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि गोल आकार की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सहज बनाए रखा जाता है।
2. पूर्व, दक्षिण और दक्षिण दिशा के नियम क्या हैं?
वास्तुशास्त्रियों का कहना है कि पूर्व, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिशा में गोल आकार की घड़ी देखने से बचना चाहिए। इन दिशा-निर्देशों के लिए त्रिकोण, चौकोर या छिपकली जी के फूल सबसे अच्छे माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये आकार अग्नि तत्व की ऊर्जा को कृषि में बनाए रखने में मदद करते हैं। दक्षिण-पूर्व दिशा में धन और समृद्धि का समावेश देखा जाता है। ऐसे में यहां सही आकार की घड़ी का अस्तर शुभ फल दे सकता है।
3. पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में कौन सा रंग चुनें?
यदि आप पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में घड़ी लगाना चाहते हैं, तो सफेद और सुनहरे रंग की कोटि की सजावट अच्छी मानी जाती है।
ये रंग स्थिरता, संतुलन और सामंजस्य सामंजस्य का प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही इन दिशाओं में गोल आकार की घड़ी भी शुभ मानी जाती है।
आस्था की जिंदगी में कैसा दिखता है असर?
लोग अक्सर घर में साज-सजावट के रिकॉर्ड से घड़ी खरीद लेते हैं, लेकिन कई पारिवारिक वास्तुशिल्प परंपराओं का ध्यान में बदलाव करने के बाद घर के सजावट में सकारात्मक बदलाव महसूस करने का दावा करते हैं।
हालाँकि, यह सूची आवश्यक है कि वास्तु शास्त्र आस्था और पारंपरिक मत पर आधारित है। इसका कोई सार्वभौम वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। फिर भी, भारत में बड़ी संख्या में लोग घर की सजावट और निर्माण में इन वास्तुशिल्प का ध्यान रखते हैं, अगर आप भी वास्तुशिल्प में विश्वास रखते हैं, तो घड़ी के विशिष्ट समय पर केवल डिजाइन ही नहीं, उसकी दिशा, रंग और आकार पर भी ध्यान दे सकते हैं।
घड़ी समय का प्रतीक है और वास्तु शास्त्र में इसे घर की ऊर्जा से जोड़ा जाता है। सही दिशा में सही रंग और आकार की घड़ी लगाने से सकारात्मक रंगीन बनाने में मदद मिल सकती है। हालाँकि, किसी भी बदलाव को अपनी सुविधा, घर का मजबूत होना और व्यक्तिगत पसंद के साथ चलना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और शर्ते सामान्य सीटू पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 उपयोगकर्ता पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
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