पुराने पर चावल तो आम आदमी का पता है, लेकिन आप क्या जानते हैं इन 5 तारीखों में नहीं है सामान्य रोटी, जानिए क्या हैं नियम

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रोटी बनाने के लिए वास्तु टिप्स: सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र में भोजन बनाने और खाने को लेकर कई जरूरी नियम बताए गए हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथों में कुछ ऐसी विशेष तिथियां बताई गई हैं, जिनमें घर की रसोई में नियमित रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता है। ब्रह्माण्ड, पूर्णिमा से लेकर बारहमासी और पूर्णिमा जैसी इन खास तिथियों पर सात्विक निवास और फलाहार करने की परंपरा है। सिद्धांत यह है कि इन दिनों संयमित प्लास्टर से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं ज्योतिष शास्त्र से कि आखिर हमें कुछ दिनों में रसोई में रोटी बनाने से पहले क्या करना चाहिए।

अधिकार: भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट पालने का साधन नहीं, बल्कि एक पवित्र कर्म माना गया है। यही कारण है कि रसोईघर को घर का सबसे महत्वपूर्ण और शुभ स्थान माना जाता है। सनातन धर्मग्रंथों, धार्मिक ग्रंथों और वास्तुशास्त्रों में बनाए गए भोजन से जुड़े कई सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन आज भी बड़ी संख्या में लोग करते हैं। विशेष रूप से कुछ खजूरें ऐसी मणियाँ होती हैं, जिन पर रोटी या अन्य खाद्य पदार्थ बनाने को लेकर अलग-अलग साँचे होते हैं। ऐसा माना जाता है कि आजकल आध्यात्मिक साधना, व्रत और पूजा-पाठ को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए स्टॉलमेंट में सोनम कपूर की सलाह दी जाती है।

लोक 18 के साथ बातचीत के दौरान ज्योतिषी एलेक्जेंड्रा पैट्रोल ने सुझाव दिया कि धार्मिक महामहिमों के अनुसार उन प्रमुख तिथियों में शामिल हैं, जब कई लोग अन्न का सेवन नहीं करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित व्रत रखने की परंपरा है। सिद्धांत यह है कि अनाज से बनी रोटी या अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने के बजाय फलाहार करना अधिक शुभ माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर रोटी बनाना मनही
इसी तरह का पर्व भगवान शिव के लिए मनाया जाता है। इस दिन भी बड़ी संख्या में विश्रामगृह स्थित हैं और विश्रामगृह में विश्रामगृह हैं। सिद्धांत यह है कि इस दिन सादा और सात्विक आहार या केवल फलाहार लेना अधिक होता है। इसलिए कई घरों में नियमित रोटी नहीं बनाई जाती।

ऑफ़लाइन का भी विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। हिंदू धर्म में यह दिन पितरों का स्मरण और तर्पण से माना जाता है। कुछ सिद्धांतों में यह शामिल है कि भोजन बनाने और खाने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कई लोग इस दिन सादा भोजन करते हैं, जबकि कुछ धार्मिक गुणों से लेकर कुछ विशेष खाद्य पदार्थ बनाने तक का दायित्व लेते हैं।

श्राद्ध पक्ष के दौरान भी इंटरनेट को लेकर कई पुराने जमाने का चलन होता है। इन दिनों को स्मारकों की स्मृति और सम्मान के लिए समर्पित माना जाता है। कई लोग तामसिक भोजन से दूरी बनाकर केवल सात्विक भोजन तैयार करते हैं। कुछ स्थानों पर रोटी बनाने या सामान्य भोजन की बजाय विशेष प्रकार के भोग और प्रसाद तैयार करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।

पूर्णिमा पर रोटी बनाने के नियम लेकर
इसके अलावा पूर्णिमा की तिथि को भी आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और भगवान की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा पर सात्विक विचारधारा और भोजन में साम्यता बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण रोटीबनाना शुभ नहीं माना जाता।

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में खाना बनाना स्वच्छता, सकारात्मक सोच और घटिया का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति भोजन बनाता है, उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। इसलिए विशेष तिथियों पर संयम, पूजा और आध्यात्मिक संप्रदाय को प्राथमिकता देने की परंपरा विकसित हुई।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

सीमा नाथ

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में फिल्म के साथ की, जिसके बाद कुछ समय के लिए उत्तर प्रदेश दीपक, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क 18) में काम किया…और पढ़ें

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