
खास बात यह है कि वास्तु विशेषज्ञ इसे संकेत की ऊर्जा से भी जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि कुछ प्राकृतिक तत्वों में शून्य ग्रह, राहु और केतु से जुड़े नकारात्मक तरंगों को आकर्षित किया जा सकता है, जिससे घर का वातावरण प्रभावित होता है।
खाली कुर्सी और वैज्ञानिक ऊर्जा का क्या है संबंध?
ज्योतिष शास्त्र में हर वस्तु को किसी न किसी ग्रह से जोड़ा जाता है। स्थान की जगह, सिंहासन या कुर्सी को सम्मान, अधिकार और अवसर का प्रतीक माना जाता है। इसका संबंध मुख्य रूप से सूर्य और बृहस्पति ग्रह से जुड़ा हुआ है।
सिद्धांत यह है कि जब कोई कुर्सी लंबे समय तक बिना उपयोग के खाली रखा रहता है, तो वह सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय बनाए रखने के बजाय उसे रोकना चाहता है। ऐसी स्थिति में राहु के ब्रह्मा का जन्म होने वाली और केतु की अंतर्संबंध वाली ऊर्जा उस स्थान पर प्रभाव डाल सकती है। इसका असर घर के लोगों के व्यवहार और सोच पर भी दिखने लगता है।
परिवार में वृद्धि की दूरी हो सकती है
वास्तु और निवास के रहस्यों को ध्यान में रखते हुए ड्रिंग रूम या बैठक में खाली जगहों वाली कुर्सियां में पारिवारिक संवाद की शुरुआत की जा सकती है। धीरे-धीरे घर के सदस्य एक-दूसरे के साथ कम समय में रहते हैं। कई बार लोगों को ऐसा लगता है कि घर में सब कुछ ठीक होने के बावजूद एक अजीब सा दोस्त और दूरियां बनी हुई हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इसमें बृहस्पति का प्रभाव, सकारात्मक ऊर्जा और तापमान का बढ़ता प्रभाव देखा जाता है। यही कारण है कि बैठक वाले स्थान को हमेशा जीवंत और उपयोग में बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
आर्थिक अवसरों पर भी प्रभाव पड़ सकता है
ज्योतिष में रिक्त स्थानों को अवसरों का प्रतीक माना जाता है। यदि घर या कार्यालय में कोई कुर्सी हमेशा खाली रहती है, तो इसे जीवन में आने वाले अवसरों के संयोग का संकेत माना जाता है। विशेष रूप से व्यापारिक स्थल पर खाली कुर्सी को शुभ नहीं माना जाता है। कई वास्तु विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि किसी कुर्सी का उपयोग नहीं हो रहा है तो उस पर कोई फ़ाइल, पुस्तक, सामान या आवश्यक वस्तु रखनी चाहिए। ऐसा करने से उस स्थान की ऊर्जा सक्रिय बनी रहती है।
राहु-केतु से संबंधित सिद्धांत
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राक्षस ब्रह्मा, राक्षस और शास्त्रीय वास्तु का कारक ग्रह माना जाता है, जबकि केतु मध्यवर्ती और वास्तुशिल्प का प्रतिनिधित्व करता है। जब घर में कुछ स्थान पर लंबे समय तक विश्राम किया जाता है, तो उन्हें इन संकेतों की ऊर्जा का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। हालाँकि यह पूरी तरह से आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों पर आधारित विचार है, लेकिन कई लोग इसे अपने दोस्तों से भी जुड़ते हैं। उनका मानना है कि घर को सुरक्षा और सक्रिय रख-रखाव से सकारात्मकता बनी रहती है।
क्या करें आसान उपाय?
वास्तु और ज्योतिष के अनुसार कुछ आसान उपाय जा सकते हैं-
1. घर में फ़्रिज अतिरिक्त कुरसियां न रखें.
2. लंबे समय तक खाली रहने वाली कुर्सी पर आराम, किताब या सजावटी वस्तुएँ।
3. बैठक कक्ष को साफ और सुरक्षा स्थिति प्रदान करना।
4. सप्ताह में एक बार स्थान की सफाई और धूप-दीप अवश्य करें।
5. उत्तर-पूर्व दिशा में राख के गोले को विशेष रूप से सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है क्योंकि यह बृहस्पति दिशा से जुड़ी हुई मणि होती है।
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की हर वस्तु ऊर्जा का माध्यम बनती है। खाली कुर्सियाँ भी केवल बैठने का साधन नहीं बल्कि अवसर, संवाद और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। चाहे आप इनमें विश्वास रखें या नहीं, लेकिन घर को सुरक्षा और सक्रियता बनाए रखें मानसिक शांति और बेहतर मनोबल के लिए हमेशा के लिए जादुई माना जाता है।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और शर्ते सामान्य सीटू पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 उपयोगकर्ता पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
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