
इस दिन बहनें अपने भाई की कलाईयों पर राखी बांधती हैं और अपनी लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, जबकि भाई हर हाल में साथ निभाने का वादा करता है। हाल के दौर में भले ही ईस्टर्न साहिल के तरीके बदल गए, लेकिन राखी का भाव आज भी गहरा ही जुड़ा हुआ पहले था।
मित्रता का मतलब क्या है?
‘रक्षा’ यानि सुरक्षा और ‘बंधन’ यानि कि तालाब। इन शब्दों को प्राचीन काल से ही मित्रवत प्रेम, विश्वास और उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता है। यह सिर्फ भाई की ओर से बहन की रक्षा का वादा नहीं है, बल्कि एक-दूसरे का साथ देना और विपरीत परिस्थिति में बने रहना भी भरोसेमंद है। आज के समय में राखी का मूल परिवार से आगे बढ़ गया है। कई लोग अपने चचेरे भाई-बहनों, करीबी दोस्तों और उन लोगों को भी राखी बांधते हैं जिनमें वे अपने परिवार का हिस्सा होते हैं।
रक्षाबंधन का इतिहास और उनसे जुड़ी कहानियाँ
मित्र राष्ट्रों की जड़ें, भारतीय पुरातत्व और पौराणिक कथाओं में गहराई से जुड़े हुए हैं। अलग-अलग समय में इस त्योहार ने रिश्तों को मजबूत करने का काम किया है।
भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा
महाभारत की सबसे बड़ी कलाकृतियों में से एक के अनुसार, जब भगवान कृष्ण की उंगली कटी थी, तब द्रौपदी ने अपनी उंगली पर एक टुकड़े का टुकड़ा बांध दिया था। कृष्ण ने इस स्नेह का मान रखते हुए जीवन भर अपनी रक्षा करने का वचन दिया।
राजा बलि देवी और लक्ष्मी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर पवित्र धागा बांधा था। बदले में राजा बलि ने उन्हें अपनी बहन का सम्मान दिया और उनकी इच्छा पूरी की।
रानी कर्णावती और हुमायूं
इतिहास में एक प्रचलित कथा के अनुसार, चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को गुलामी की मदद की थी। यह कहानी इस त्योहार को धर्म और सीमाओं से ऊपर के शिखर बंधन को जोड़ने वाला प्रतीक है।
मित्रता दिवस कैसे मनाया जाता है?
रक्षाबंधन की शुरुआत सुबह स्नान और पूजा की तैयारी से होती है। बहनें एक थाली सजाती हैं, जिसमें राखी, रोली, चावल, दीया और मिठाई की सजा दी जाती है। पूजा के दौरान बहन भाई के मनमोहक पर तिलक लगाती है, उसकी आरती उतारती है और कलाईयों पर राखियां बांधती है। इसके बाद मिठाई बनाई जाती है और भाई अपनी बहन को उपहार देता है। हालाँकि हर परिवार की अपनी परंपराएँ होती हैं, लेकिन इस दिन का मूल भाव एक ही रहता है-प्यार और साथ।
परिवर्तनीय दौर में अँगरेज़ी मित्र राष्ट्र का रंग
तकनीक ने इस त्योहार को नई पहचान दी है. आज भाई-बहन अलग-अलग शहरों और देशों में रहते हुए भी वीडियो कॉल के जरिए साथ में रक्षाबंधन मना रहे हैं। ऑनलाइन, डिजिटल नोटिफिकेशन और पहले से जारी राखियां दूरियों पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बीज वाली और हाथ से बनी इको-फ्रेंडली राखियों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
संगठन पर क्या उपहार?
क़ीमती उपहारों से अधिक मूल्य उस भावना का होता है जो उसके साथ जुड़ी हुई है। आप अपनी बहन या भाई की पसंद के हिसाब से किताब, हस्तनिर्मित कार्ड, फोटो एलबम, पौधा, गहना या अपनी कोई यादगार चीज उपहार में दे सकते हैं, अगर आपका भाई या बहन दूर रहता है, तो एक दिल से लिखा संदेश या पुराने सामान का छोटा-सा कोलाज भी इस दिन को खास बना सकते हैं।
आज भी क्यों है मित्रता?
तेजी से बदलती दुनिया में मित्र राष्ट्र के लिए मोशन पिक्चर की याद ताजा करती है। यह प्राचीन मान्यता है कि परिवार का सिर्फ खून से रिश्ता नहीं है, बल्कि पहचान और साथ का नाम है। राखी का धागा अच्छा ही अमिताभ दिखता हो, लेकिन इसके पीछे की संभावनाएं हर मुश्किल से मजबूत होती हैं। यही कारण है कि लोगों के दिलों में रक्षाबंधन का अपना स्थान बना हुआ है।
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