
हालाँकि पूजा में सबसे ज्यादा महत्व भक्ति और सात्विक मन का होता है, फिर भी ईसा मसीह के अनुसार कुछ विशेष भोगों का अलग महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं कि गणेश जी को कौन-कौन से ब्लॉग पर जाना चाहिए, उनका धार्मिक महत्व क्या है और पूजा के समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
गणेश जी को सबसे प्रिय मोदक है
गणेश जी का नाम सबसे पहले आता है मोदक का नाम. धार्मिक मान्यता के अनुसार मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोजन माना जाता है। खासतौर पर स्नैक्स में बने मोदक या नारियल और गुड़ के भरवां वाले मोदक चड़ाने की परंपरा काफी पुरानी है. माना जाता है कि गणेश जी को 21 मोदक बनाना शुभ माना जाता है, अगर घर पर मोदक बनाना संभव नहीं है तो बाजार से भी श्रद्धा के साथ उछाला जा सकता है।
1. लोध का भी बहुत महत्व है
बेसन और बूरी के लोध मोदक के अलावा बेसन और बूरी के लोध भी भगवान गणेश को बेहद प्रिय माने जाते हैं। कई पिपरी में नियमित रूप से लोध का उपयोग किया जाता है। सिद्धांत यह है कि लोध समृद्धि, मिश्रण और सुख का प्रतीक होते हैं। पूजा के बाद ईसा प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य लोगों में बाँटना भी शुभ माना जाता है।
2. दूर्वा चढाने का महत्व
गणेश पूजा में खास मिठाई ही नहीं, बल्कि दूर्वा घास का भी खास महत्व बताया गया है. मान्यता है कि भगवान गणेश को 21 पेट वाली दूर्वा बेचने से वे आकर्षित होते हैं। पूजा के दौरान दूर्वा को साफ पानी से धोकर श्रद्धा के साथ चढ़ाना चाहिए। कई लोग भोग के साथ दूर्वा सुरक्षा करना नहीं भूलते, क्योंकि इसे पूजा का अहम हिस्सा माना जाता है।
3. इन फूलों का भी उपयोग किया जा सकता है
अगर घर में मिठाई उपलब्ध नहीं है तो सामुहिक फल भी भगवान गणेश को बेचा जा सकता है। केला, अमारूद, अनार, सेब, नारियल और फल चढ़ाना शुभ माना जाता है। फल हमेशा उपचार और साफ होना चाहिए। बासी या अशुभ फल पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
4. गुड़ और नारियल का भोग भी शुभ माना जाता है
ग्रामीण क्षेत्र में आज भी कई परिवार गणेश जी को गुड़ और नारियल का भोग लगाते हैं। गुड़ को साध्य और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, जबकि नारियल को शुभता का प्रतीक माना जाता है, यदि किसी कारण से गुड़ उपलब्ध नहीं है तो गुड़ और नारियल को भी पवित्रता से पवित्र किया जा सकता है।
पूजा के समय इन बातों का ध्यान
1. भोग से पहले करें पूजा
सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें, दीपक जलाएं, फूल मालाएं और मंत्रों का जाप करें। इसके बाद ही निस्वार्थता करना सर्वोत्तम माना जाता है। भोग का समय मन शांत और एकाग्र होना चाहिए।
2. तामसिक भोजन न चढ़े
धार्मिक संगीत के अनुसार भगवान गणेश को प्याज, लहसुन, मांसाहार या किसी भी तरह का तामसिक भोजन नहीं खिलाया जाता। सात्विक और ताज़ा भोजन ही सुरक्षित होना चाहिए।
3. श्रद्धा सबसे बड़ा भोग
धार्मिक मान्यता है कि भगवान सिर्फ भोग नहीं करते, बल्कि भक्त की भावना देखते हैं, अगर किसी के पास धार्मिक व्यंजन बनाने की सुविधा नहीं है तो वह गुड, फल या साधारण भी शिष्य मन से निश्चिंत हो सकते हैं। पूजा का सबसे बड़ा आधार श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक भावना है। सच्ची भक्ति के बजाय गणेश जी की आराधना अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और शर्ते सामान्य सीटू पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 उपयोगकर्ता पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
Discover more from News Link360
Subscribe to get the latest posts sent to your email.






