
इस सीरीज में भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमजोरी उसका अनिश्चित बल्लेबाजी क्रम रहा है. लगातार किए जा रहे फेरबदल के कारण बल्लेबाजों को अपने रोल समझने में साफ़ तौर पर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. जब खिलाड़ियों को यह नहीं पता होता कि उन्हें किस नंबर पर जाकर पारी को संभालना है या कब आक्रामक होना है, तो ऐसे में मानसिक दबाव बढ़ना लाजमी है. तीसरे टी20 मैच में भारतीय थिंक-टैंक का यह प्रयोग टीम पर बेहद भारी पड़ा था। टीम मैनेजमेंट ने बेहतरीन फॉर्म में चल रहे और स्थापित मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा (Tilak Varma) से ऊपर बल्लेबाजी करने के लिए ऑलराउंडर अक्षर पटेल (Axar Patel) को भेज दिया.
भारत इन गलतियों की वजह से टी20 सीरीज हार की कगार पर पहुंच गया है.
इतना ही नहीं, विस्फोटक बल्लेबाज शिवम दुबे से पहले हर्षित राणा (Harshit Rana) को बैटिंग के लिए क्रीज़ पर उतार दिया गया. नतीजा यह हुआ कि कोई भी बल्लेबाज परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढाल नहीं पाया और पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर कर सिर्फ 76 रन पर सिमट गई. चौथे टी20 में कप्तान श्रेयस अय्यर और कोच को इस ‘म्यूजिकल चेयर’ के खेल को बंद करना होगा और हर बल्लेबाज को एक तय रोल देना होगा, ताकि वे मानसिक रूप से तैयार होकर मैदान पर उतर सकें.
पेस अटैक की नाकामी
इंग्लैंड की पिचें और वहां का मौसम हमेशा से तेज गेंदबाजों के अनुकूल माना जाता है. इस सीरीज़ में अब तक इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने इन घरेलू परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाया है और भारतीय बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया है. इसके ठीक उलट, श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय पेस बैटरी इन अनुकूल कंडीशंस का इस्तेमाल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है. तीसरे टी20 मैच की पिच तेज गेंदबाजों के लिए मददगार थी, लेकिन युवा प्रिंस यादव (Prince Yadav) को छोड़कर कोई भी भारतीय गेंदबाज अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं रहा. प्रिंस ने जरूर कुछ प्रभावित किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से कोई सहयोग नहीं मिला.
टीम के मुख्य तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह इस सीरीज़ में अब तक काफी महंगे साबित हुए हैं. वे इस सीरीज़ में केवल 3 विकेट ही निकाल पाए हैं, जबकि उनका इकोनॉमी रेट 9.50 का रहा है.वहीं, हर्षित राणा की स्थिति और भी खराब रही है, जिन्होंने लगभग 10 की इकोनॉमी से रन लुटाए हैं. अगर भारत को ब्रिस्टल में वापसी करनी है, तो तेज गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में विकेट चटकाने होंगे और पावरप्ले में रन गति पर अंकुश लगाना होगा.
मिडिल ऑर्डर का फ्लॉप शो
भारतीय टीम के लिए इस सीरीज़ में एकमात्र सकारात्मक पहलू टॉप ऑर्डर में अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) की बल्लेबाजी रही है. अभिषेक ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से टीम को अच्छी शुरुआत देने की कोशिश की है. लेकिन कहानी इसके ठीक उलट मिडिल ऑर्डर में जाकर पूरी तरह बदल जाती है. भारत का मध्यक्रम इस पूरी सीरीज में बुरी तरह से फेल रहा है. कप्तान श्रेयस अय्यर खुद मोर्चे से अगुआई करने में नाकाम रहे हैं और उनके बल्ले से रन नहीं निकल रहे हैं. तिलक वर्मा और अक्षर पटेल भी अब तक कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ सके हैं.
वहीं, विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन से जैसी ताबड़तोड़ पारियों की उम्मीद थी, वे भी उन उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं. मध्यक्रम के इस फ्लॉप शो के कारण टॉप ऑर्डर पर दबाव दोगुना हो जाता है. चौथे टी20 में अगर इंग्लैंड को सीरीज़ सील करने से रोकना है, तो मिडिल ऑर्डर के इन अनुभवी और स्टार खिलाड़ियों को विकेट पर टिकने का जज्बा दिखाना होगा और जिम्मेदारी के साथ मैच जिताऊ पारियां खेलनी होंगी.
ब्रिस्टल में क्या होगी भारत की रणनीति?
ब्रिस्टल का काउंटी ग्राउंड अमूमन बल्लेबाजों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन यहां की बाउंड्रीज़ और हवा का रुख गेंदबाजों के लिए भी मौके बनाता है. भारतीय टीम को यहां टॉस की भूमिका पर भी ध्यान देना होगा. हालांकि, टॉस से ज्यादा अहम यह होगा कि जो 11 खिलाड़ी मैदान पर उतरें, वे अपनी योजनाओं को सही ढंग से लागू करें.
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