Vedas: शादियां पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न होती हैं. लेकिन हर शादी सफल नहीं होती. पति-पत्नी के बीच हल्की-फुल्की नोंकझोंक कभी-कभी बड़े विवाद और कई बार तो हिंसा का रूप भी ले लेती है. लेकिन महिलाएं इस हिंसा को कई बार यह मानकर भी सह जाती हैं कि, वेद और प्राचीन धर्म ग्रंथों में शादी को कभी न टूटने वाला बंधन बताया गया है.
पुराने धार्मिक ग्रंथों में आमतौर पर शादी को अंतिम सांस तक न टूटने वाला बंधन माना जाता है. हिंदू धर्म में विवाह को एक नहीं बल्कि सात जन्मों का बंधन कहा जाता है, जिससे महिलाओं को धार्मिक फर्ज के नाम पर सबसे मुश्किल हालात में भी रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
लेकिन यह पूरी तरह से सत्य नहीं है. वेद कभी भी महिलाओं को हिंसन विवाह में बने रहने को नहीं कहता और ना ही हिंसा सहने की सीख लेता है. रिलेशनशिप कोच कैश रुपरेलिया ने अपने इंस्टा पेज पर इस बारे में विस्तारपूर्वक बताया है-
कैश रुपरेलिया के अनुसार, जब आप वेदों को गहराई से पढ़ते हैं, तो असल में वो इससे बिल्कुल अलग है. वेद कोई कट्टर धर्म नहीं है, वेद चेतना के विकास के लिए बनाई गई जीवन शैली है. वेदों में शादी को एक आध्यात्मिक साझेदारी और एक साथ मिलकर एक ऊंचे मकसद को पूरा करने की आपसी जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाता था. पति-पत्नी से आत्म-ज्ञान और आध्यात्मिक विकास के लिए अपने-अपने कर्तव्य निभाने की उम्मीद की जाती थी.
वैदिक सिद्धांत के अनुसार, धर्म, सत्य और पवित्रता ही शादी को बांधता है. जहां धर्म नहीं है, वहां सच्ची शादी नहीं है. दुर्व्यवहार, क्रूरता और पत्नी को छोड़ देना साझेदारी के मूल आध्यात्मिक मकसद का उल्लंघन करते हैं. अगर पति अपनी पत्नी के साथ गाली-गलौज करता है, हेरफेर करता है या अपने धार्मिक कर्तव्यों को पूरा नहीं करता, तो आपको उसके साथ नहीं रहना चाहिए.
पौराणिक समय से ही वेद हमेशा धर्म, मकसद, पवित्रता और सच्चाई के पक्ष में रहे हैं. वेद कभी भी डर वाले कंट्रोल, दबदबे या धार्मिक हेरफेर के पक्ष में नहीं थे. कैश रुपरेलिया के अनुसार सच्ची आध्यात्मिकता चेतना के विकास की सेवा करती है, न कि पितृसत्तात्मक कंट्रोल सिस्टम की.
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