बालों में तेल लगाने की प्राचीन कला! आयुर्वेद का रहस्य, स्वस्थ बालों का राज़! जानें सही तरीका और फायदे


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Ancient art of hair oiling: योग का लाभ उठाने से लेकर आयुर्वेद के पारंपरिक तरीकों को अपनाने तक, हमने भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही कई प्रैक्टिस को जाना है. लेकिन अगर आपको भी लगता है कि, आपने सब कुछ ट्राई कर लिया है, तो एक भारतीय परंपरा है, जो चुपके से पश्चिमी संस्कृति में जगह बना चुकी है.

बालों में तेल लगाने की प्राचीन कला है, एक पुरानी रस्म जिसका संबंध आयुर्वेद से जुड़ा है. 

बालों में तेल लगाना क्यों जरूरी?

स्वस्थ जीवन जीने का 5000 साल पुराना विज्ञान जिसकी शुरुआत भारत में हुई थी. इस दुनिया के सबसे पुराने इलाज के प्रणाली में से एक बनाते हुए, बालों में तेल लगाने की कला एक प्राचीन प्रैक्टिस है, जिसमें आपके बालों और स्कैल्प पर तेल डालना, फिर धीरे-धीरे मसाज करना शामिल है, जो बालों को गहराई से पोषण देता है. 

आयुर्वेद का ज्ञान भारतीय हेयरकेयर परंपराओं को समग्र समाधान देता है, जो हेल्दी हेयर पाने के लिए शरीर, आत्मा और मन पर निर्भर करता है. आयुर्वेदिक कॉन्सेप्ट को मौजूदा हेयरकेयर रूटीन में शामिल करने से बालों की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है. 

बालों में तेल लगाने के सरल फायदे

बालों में तेल लगाने से ऑयल फॉलिकल्स में गहराई तक जाता है, जिसमें सबसे अहम न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं जो बालों के शॉफ्ट को पोषण और हाइड्रेट करते हैं, जिससे हमारे बालों का रूखापन और फ्रिज कम होता है. 

इस क्रिया से स्कैल्प में खून का बहाव बढ़ता है, जिससे बालों का विकास होने के साथ जड़े भी मजबूत होती हैं. इसके अलावा बालों का टूटना और झड़ना भी कम होते चला जाता है. 

स्कैल्प में तेल से मालिश करने से स्कैल्प का बल्ड सर्कुलेशन बेहतर होने के साथ ड्रैंड्रफ की समस्या कम होती है, सिर की त्वचा हेल्दी रहती है. इसके अलावा तेल से रोजाना सिर पर इस्तेमाल करने से नैचुरल चमक और निखार आता है. स्कैल्प में तेल मालिश करने से स्ट्रेस और मानसिक तनाव कम होता है. 

भारतीय शास्त्रों और आयुर्वेद में सिर पर तेल लगाने को मात्र सौंदर्य ही नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक से भी जोड़ा गया है. इसे शास्त्रों में मूर्धा तैल अभ्यंग कहा गया है. 

शास्त्रों में सिर पर तेल मालिश के नियम

शास्त्रों में प्रतिदिन सिर पर तेल लगाना जरूरी नहीं बताया गया है. आयुर्वेद के अनुसार, हफ्ते में 1 से 2 बार ही तेल लगाना चाहिए. रोज तेल लगाने से कफ दोष की समस्या बढ़ने के साथ सर्दी और जुकाम होने की संभावना बढ़ सकती है. 

शास्त्रों के मुताबिक, सिर पर तेल लगाने का सबसे बेहतर समय सुबह नहाने से पहले बताया गया है. रात में तेल लगाकर सोना कुछ लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पाचन कमजोर होने के साथ कफ की समस्या बढ़ सकती है. 

शास्त्रों के मुताबिक, सर्दियों के दिनों में अधिक मात्रा में तेल लगाने से बचना चाहिए. ऐसा करने से सिरदर्द और सर्दी जुकाम की समस्या हो सकती है.

सही तेल का चुनाव जरूरी?

शास्त्रों के अनुसार हर तेल सिर की मालिश के लिए सही नहीं माना जाता-

  • नारियल का तेल गर्मी और मानसिक तनाव से छुटकारा पाने के लिए लाभकारी माना गया है.
  • तिल का तेल वात दोष और सिरदर्द की समस्या से छुटकारा दिलाता है. 
  • आंवला या ब्राह्मी तेल बालों की गुणवत्ता को बढ़ाने का काम करता है.

शास्त्रों के मुताबिक, तेल लगाने के 40-45 मिनट के बाद ही बाल धोना चाहिए. इससे तेल का प्रभाव नसों और दिमाग तक पहुंचता है. बालों में तेल लगाने के बाद तुरंत नहाने से इसका लाभ नहीं मिलता है.

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, व्रत, अमावस्या और ग्रहण काल के दौरान सिर में तेल लगाना वर्जित माना गया है. इन विशेष दिनों में तेल लगाने से शरीर पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है. 

शास्त्र साफ कहते हैं कि, सिर पर तेल लगाना तभी लाभकारी माना जाता है, जब इसे सही समय, सही तेल और सही मात्रा में किया जाए. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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