इस्लाम में पश्चिम की ओर पैर करके सोना हराम, मकरूह या सिर्फ गलतफहमी? जानें पूरी हकीकत!


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Sleeping Habits in Islam: इस्लाम सिर्फ एक धर्म नहीं है, बल्कि जिंदगी कैसे जीनी है, इसका पूरा सलीका और तरीका भी बयान करता है. इस धर्म में सिर्फ इबादत का ही जिक्र नहीं है, बल्कि नैतिक शिक्षा के साथ जीवन में पेश आने वाले हर छोटे-बड़े सवाल और सवाल का जवाब भी बताती है.

खान-पान, उठना-बैठना और बात करने के तरीके से लेकर सोने तक के लिए रास्ता बताता है और अगर कोई सच्चा मुसलमान इन रास्तों पर पूरा चलता है तो उसका खाना-पानी, उठना, और बैठना भी इबादत माना जाता है. इसलिए इस्लाम की तालीमात पर अमल बहुत ही जरूरी है. 

इस्लाम में किब्ला (खान-ए-काबा की दिशा) का सम्मान अदब का हिस्सा है. भारत में रह रहे मुसलमानों के लिए (किब्ला) पश्चिम दिशा की ओर है, इसलिए इसको लेकर मुसलमानों के बीच सम्मान जरूरी है.

यहां ये बात नोट करने वाली है कि अगर कोई मुसलमान अमेरिका में रह रहा है तो उसके लिए किब्ला पूरब की दिशा होगी और वहां के मुसलमानों के लिए सम्मान की दिशा पूरब होगी.

किब्ला की दिशा में पैर करके सोना कैसा?

इस्लामी तालीम में किसी चीज के हुक्म (आदेश) को कई कैटगरी में बांट सकते हैं. एक हुक्म सीधा है, जिसका करना लाजिम है—जैसे नमाज का पढ़ना, जकात का देना, रोजे का रखना, आदि. दूसरी चीज होती है अदब, यानी ऐसा आदेश जिसका करना जरूरी तो नहीं है, लेकिन सम्मान देने के लिए ऐसा करना चाहिए.

इसी क्रम में किब्ला की तरफ यानी पश्चिम दिशा की ओर पैर करके सोना अच्छा नहीं माना जाता, बेअदबी शुमार की जाती है. कुछ आलिम-ए-दीन इसे मकरूह की श्रेणी में ले जाते हैं. पश्चिम दिशा में किबला (खाना-ए-काबा) स्थित है.

लेकिन एक सवाल यह उठता है कि क्या इस बात का उल्लेख कुरान और हदीस में मिलता है, या यह केवल सांस्कृतिक और सामाजिक मान्यता पर आधारित है? आइए इस विषय की पूरी जानकारी इस्लामी स्रोतों के आधार पर समझते हैं.

किबला (पश्चिम) और उसकी अहमियत

पश्चिम वह दिशा है जिसकी तरफ हर मुसलमान नमाज अदा करते हैं. दुनिया भर के मुसलमान मक्का में स्थित खाना-ए-काबा की ओर रुख करके इबादत करते हैं. किबला का सम्मान करना इस्लाम में बेहद महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से अल्लाह की इबादत के दौरान.

क्या कुरान में पश्चिम की ओर पैर करके सोने की मनाही है?

कुरान-ए-करीम में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि पश्चिम दिशा की ओर पैर करके सोना हराम या मकरूह है. है. सूरह अल-बकरा:144 अध्याय में लिखा है कि “तुम अपना रुख मस्जिद-ए-हराम की ओर कर लो.” यह आदेश नमाज पढ़ने के लिए है, सोने या आराम करने के लिए नहीं.

हदीसों में भी हमें सोने की दिशा को लेकर कोई सख्त आदेश या मनाही नहीं मिलती. लेकिन हां, सोने के तरीके (पोजिशन) के बारे में उल्लेख किया गया है. पैगंबर मुहम्मद ने फरमाया है कि “जब तुम सोने लगो तो दाईं करवट लेटो.”

सहीह बुखारी शरीफ में क्या बताया गया है?

हमेशा दाईं करवट सोएं, लेकिन यह नहीं कहा गया कि पैर किस दिशा में हों. इससे साफ पता चलता है कि दिशा नहीं, बल्कि तरीका अहम है.

फिर यह धारणा आई कहां से?

यह मान्यता कि पश्चिम की ओर पैर करके सोना गलत है, अधिकतर स्थानीय परंपराओं, सांस्कृतिक प्रभावों और गलत व्याख्याओं से पैदा हुई है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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