किसी भी दुल्हन के लिए शादी का दिन काफी विशेष होता है. विवाह में शादी का जोड़ा केवल सजावट के लिए ही नहीं पहना जाता, बल्कि इसका संबंध ऊर्जाओं से भी होता है. कई ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं, जिसमें किराए का लहंगा पहनने की मनाही होती है.
माना जाता है कि, किराए का लहंगा पहनने से नकारात्मक ऊर्जा शादीशुदा जीवन पर प्रभाव डालती है.
शादी में अक्सर बजट बचाने के चक्कर में या आकर्षक विकल्प के कारण कई लोग किराए पर लहंगा लेना सही मानते हैं, लेकिन कथावाचक शिवम साधक ने कहा कि, धार्मिक और पारंपरिक लिहाज से ऐसा करना दांपत्य जीवन के लिए अशुभ है.
कथावाचक शिवम साधक ने क्या कहा?
हिंदू धर्म में शादी के कपड़ों को बेहद पवित्र माना जाता है. यह परिधान केवल पहनावे का हिस्सा ही नहीं, बल्कि एक तरह की आध्यात्मिक आवरण (Covering) का भी काम करती है. शादी में दुल्हन द्वारा पहना गया लहंगा उसके दांपत्य जीवन की शुरुआत का प्रतीक है.
इसलिए यह कपड़ा उसका खुद का होना चाहिए, नया और पूरी तरह से उसकी ऊर्जा से जुड़ा है.
किराए पर लहंगा क्यों नहीं लेना चाहिए?
पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक, जिस कपड़े को किराए पर लेकर शादी में पहना जाता है, उसपर उनकी भावनाएं और परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है. शादी जैसे महत्वपूर्ण और अत्यंत पवित्र संस्कार में इस तरह के कपड़ो को पहनकर भाग लेना उचित नहीं है.
दुल्हन के लिए नया लहंगा सौभाग्य, समृद्धि और दांपत्य जीवन की शुभ शुरुआत का प्रतीक माना गया है.
कम बजट में अपनाएं ये तरीका?
यदि आपके पास बजट की कमी है, तो ऐसी स्थिति में आपके लिए यही सलाह है कि, कम सामान्य बजट में सादा लहंगा का चयन करें. आजकल कम कीमतों पर भी सुंदर और आकर्षक लहंगे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. शादी जैसे पवित्र संस्कार में इस तरह के वस्त्रों पर निवेश करना शुभ माना गया है.
विवाह का लहंगा हर दुल्हन के लिए उनकी जीवनभर की यादों से जुड़ा होता है. अपना लहंगा पहनने का सुख और उससे जुड़ी यादें कभी भी किराए पर लिए गए वस्त्रों से नहीं मिल सकती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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