एसयूवी गाड़ियों की ‘आंधी’ में तनकर खड़ी रही ये सेडान, 2025 में बन गई इंडिया की नंबर 1 कार
मारुति सुजुकी डिजायर ने 2025 में 2.14 लाख यूनिट्स बिककर बेस्ट-सेलिंग कार का खिताब जीता, जबकि एसयूवी सेगमेंट में क्रेटा और टाटा नेक्सॉन पीछे रहे. डिजायर के लिए ये सेल्स फिगर बेहद खास हैं क्योंकि, इन दिनों भारत में एसयूवी कारों की जबरदस्त डिमांड है. ऐसे में किसी सेडान मॉडल का बेस्टसेलर बनना अपने आप में बेहद खास है.

डिजायर की 2.14 लाख यूनिट्स
अगर आंकड़ों की बात करें तो मारुति सुजुकी डिजायर ने 2.14 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ बेस्ट-सेलिंग मॉडल्स की लिस्ट में टॉप पर जगह बनाई है. इसके बाद एसयूवी सेगमेंट की क्रेटा रही, जिसकी 2.01 लाख यूनिट्स बिकीं, और टाटा नेक्सॉन ने भी 2.01 लाख यूनिट्स की बिक्री दर्ज की. चौथे और पांचवें नंबर पर मारुति सुजुकी वैगनआर और मारुति सुजुकी अर्टिगा रहीं. वैगनआर की 1.94 लाख यूनिट्स बिकीं, जबकि अर्टिगा की 1.92 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई.
फैमिली की पहली पसंद
मारुति सुजुकी डिजायर हमेशा से ही फैमिली खरीदारों की पसंद रही है और टूर एस वेरिएंट के तहत फ्लीट ऑपरेटर्स के बीच भी काफी लोकप्रिय है. डिजायर की मजबूत खूबियों ने परिवारिक ग्राहकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है. इसका लेटेस्ट जेनरेशन मॉडल 2024 के अंत में लॉन्च किया गया था, जिससे इसकी बाजार में प्रासंगिकता बनी रही और यह स्विफ्ट हैचबैक से अलग अपनी पहचान बनाने में सफल रही. यह भी खास है कि नई जनरेशन डिजायर लगातार अपने सेगमेंट की सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वियों – हुंडई ऑरा और नई होंडा अमेज को बिक्री में पीछे छोड़ रही है.
बदलता ऑटोमोबाइल बाजार
ये आंकड़े भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में बड़ा बदलाव दिखाते हैं. भले ही एसयूवी सेगमेंट अभी भी कुल इंडस्ट्री सेल्स का आधे से ज्यादा हिस्सा रखता है, लेकिन सबसे लोकप्रिय मॉडल एक कॉम्पैक्ट सेडान ही है, जो उपभोक्ताओं की खरीदारी में वैल्यू, एफिशिएंसी और ओनरशिप कॉस्ट की अहमियत को दर्शाता है. साथ ही, कंपनी ने बताया कि उसकी हैचबैक सेगमेंट की कारों ने भी कुल बिक्री में अहम योगदान दिया है. दिसंबर 2025 में बलेनो 22,108 यूनिट्स की बिक्री के साथ सबसे ज्यादा बिकने वाला मॉडल बना, जिससे प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में भी ग्राहकों की दिलचस्पी बनी हुई है, भले ही बाजार में एसयूवी का दबदबा हो.
मिनी सेगमेंट का मार्केट शेयर
मारुति सुजुकी ने कहा कि एंट्री-लेवल और कॉम्पैक्ट सेगमेंट में रिकवरी जीएसटी एडजस्टमेंट के बाद बढ़ी अफोर्डेबिलिटी और बेहतर फाइनेंसिंग विकल्पों की वजह से संभव हुई है. मिनी सेगमेंट अब कुल बिक्री का 6.2 फीसदी हिस्सा बन गया है, जिसमें नए खरीदार एक बार फिर बाजार में आ रहे हैं.
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