IIT कानपुर के छात्रों ने सिर्फ 20 रुपये में तैयार किया ‘पंचामृत’, जानें बच्चों को कैसे दे रहा ‘अमृत’?


IIT कानपुर के छात्रों ने एक मिसाल पेश की है. छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि छोटी-सी पहल भी बड़े बदलाव की वजह बन सकती है. महज 20 रुपये महीने की हेल्प से ये स्टूडेंट्स 230 जरूरतमंद बच्चों को हफ्ते में पांच दिन हेल्दी खाना खिला रहे हैं. IIT कानपुर के छात्रों की ओर से की गई इस पहल को पंचामृत नाम दिया गया है, जो अब बच्चों के लिए सचमुच अमृत बन गया है. वहीं इस पहल को बच्चों की पढ़ाई से भी जोड़ा जा रहा है. 

पहल न सिर्फ बच्चों का पेट भर रही, बल्कि पढ़ाई से भी जोड़ रही 

IIT कानपुर कैंपस के आसपास रहने वाले कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं. इन्हीं परिवारों के बच्चों के लिए कैंपस में 1964 से ही ऑपर्च्युनिटी स्कूल चलाया जा रहा है, जहां फ्री में एजुकेशन दी जाती है. समय के साथ स्कूल प्रशासन ने महसूस किया था कि कई बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं, जिसकी मुख्य वजह भूख और कुपोषण थी. कई बच्चे टिफिन तो लाते थे, लेकिन गर्मी और बारिश में खाना खराब हो जाता था. हालात ऐसे थे कि कुछ बच्चे क्लास के दौरान बेहोश तक हो जाते थे. जब यह समस्या IIT कैंपस तक पहुंची तो 2024 में इसका समाधान निकालने की पहल की गई. प्रोफेसरों के प्रोत्साहन पर हॉस्टल 5 के छात्रों ने स्कूल के बच्चों को हेल्दी खाना देने की जिम्मेदारी उठाई, जिसके बाद योजना बनी कि बच्चों को राजमा-चावल, छोले-चावल और कढ़ी-चावल जैसा हेल्दी और सादा खाना दिया जाएगा. 

IIT कानपुर के छात्रों ने 20 रुपये से बदली तस्वीर

IIT कैंपस की तरफ से जब बच्चों को खाना खिलाने के लिए हिसाब लगाया गया ताे सामूहिक रूप से खाना बनवाने पर रोज का खर्च करीब 3000 रुपये आया था. वहीं पूरे महीने का हिसाब लगाया गया तो सामने आया कि हॉस्टल 5 के करीब 600 छात्रों के मेस बिल में सिर्फ 20 रुपये प्रति छात्र जोड़ने से यह खर्च आसानी से निकल सकता है. इसके बाद सभी की सहमति बनी और जुलाई 2024 में पहली बार 230 बच्चों को गर्म और ताजा भोजन परोसा गया. धीरे-धीरे यह पहल हॉल 1, हॉल 3, हॉल 8 और गर्ल्स हॉस्टल 1 तक पहुंची, जहां के स्टूडेंट्स भी बिना हिचक सहयोग के लिए आगे आ गए. इसके बाद बच्चों को हफ्ते में पांच दिन नियमित रूप से खाना मिलने लगा.

पंचामृत से बदल गई बच्चों की सेहत और पढ़ाई

IIT कानपुर के छात्रों की ओर से की गई इस पहल को पंचामृत नाम दिया गया, जो सामूहिक सहयोग का प्रतीक बन गया है. स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. चेतना मिश्रा के अनुसार इस पहल का असर साफ दिखाई दे रहा है. बच्चे पहले से ज्यादा एक्टिव और हेल्दी है और पढ़ाई में भी उनका मन लगने लगा है. वहीं स्कूल के इंचार्ज प्रो. टी. के. गुहा बताते हैं कि इस पहल को लेकर स्टूडेंट्स से ऑनलाइन सहमति और आपत्तियां मांगी जाती हैं, लेकिन अब तक किसी ने आपत्ति नहीं जताई. सभी छात्र पंचामृत को लेकर बहुत पॉजिटिव हैं.

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