108 फुट ऊंची, सोने जैसी चमक… अक्षरधाम मंदिर में खड़ी ये दिव्य प्रतिमा किसकी है? जो फ्लाईओवर से भी दिखेगी
Statue of Neelkanth Varni at Akshardham: देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थिति अक्षरधाम हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहा है, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है. अक्षरधाम मंदिर परिसर में नीलकंठ वर्णी की एक चमकदार और विशाल प्रतिमा लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है.
108 फुट ऊंची स्वामीनारायण तप प्रतिमा में युवा संत नीलकंठ वर्णी एक पैर पर खड़े होकर आकाश की ओर भुजाएं उठाए, गहरी ध्यान मुद्रा में लीन हैं.
प्रतिमा का आधिकारिक तौर पर अनावरण बाकी
बता दें कि नीलकंठ वर्णी की इस विशाल प्रतिमा का अभी तक आधिकारिक तौर पर अनावरण नहीं हुआ है, लेकिन आधार निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. युवा संत की ये प्रतिमा मंदिर के चारों और से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है.
उम्मीद की जा रही है कि, इसी साल मार्च महीने तक प्रतिमा का अभिषेक और पूजा समारोह आयोजित किया जाएगा.
स्वामीनारायण की प्रतिमा उनके किशोरावस्था से प्रेरित
अक्षरधाम में स्थापित होने वाली ये प्रतिमा स्वामीनारायण को उनके किशोरावस्था से प्रेरित है, जब लोग उन्हें नीलकंठ वर्णी कहकर बुलाते थे. मात्र 11 साल की आयु में उन्होंने उत्तर प्रदेश स्थित अपना घर छोड़ा दिया था, कमर में केवल एक कपड़ा बांधकर सादा जीवन व्यतीत किया और सात सालों तक पैदल यात्रा की.
इस दौरान उन्होंने भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान और बांग्लादेश समेत हजारों किलोमीटर की यात्रा तक की, पवित्र तीर्थ स्थलों के दर्शन किए और कम से कम भोजन-पानी पर जीवन व्यतीत किया.
प्रतिमा में दर्शाई गई मुद्रा नेपाल के मुक्तिनाथ में उनकी गहरी तपस्या के एक क्षण को दिखाती है, जहां वे एक पैर पर खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर उठाकर गहरी साधना में लीन हैं. त्याग और अध्ययन का यह समय उनके जीवन और शिक्षाओं का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है.
Coming Soon at Swaminarayan Akshardham, New Delhi
Parabrahma Bhagwan Swaminarayan as Tapomurti Shri Nilkanth Varni Maharaj — a 108-foot-tall murti, embodying austerity, renunciation, and spiritual discipline.
Murti will be ceremonially inaugurated at the end of March 2026 by… pic.twitter.com/np8Xgs4hzt
— Swaminarayan Akshardham – New Delhi (@DelhiAkshardham) January 2, 2026
अक्षरधाम में प्रतिमा का महत्व?
दिल्ली का अक्षरधाम सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धार्मिक स्थलों में से एक है, जो अपनी जटिल कारीगरी और पारंपरिक भारतीय स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है. नई प्रतिमा के स्थापित होने से श्रद्धालुओं के बीच एक नया आकर्षण जुड़ेगा.
दुनियाभर के अन्य स्वामीनारायण मंदिरों की ही तरह इस विशाल प्रतिमा की स्थापना लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का काम करेगी. ऐसी ही प्रतिमा गांधीनगर और न्यू जर्सी के स्वामीनारायण मंदिरों में भी स्थापित है.
नीलकंठ वर्णी कौन थे?
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के पास एक गांव में सन् 1781 में जन्मे भगवान स्वामीनारायण ने अपना शुरुआती जीवन छपैया और अयोध्या में बिताया. कम उम्र में नीलकंठ वर्णी ने हजारों मील की यात्रा नंगे पैर करना शुरू कर दी.
इस दौरान वे अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों से मिलें और उनसे जीवन, आस्था, करुणा और आंतरिक शक्तियों के बारे में जाना.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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