Surya Kund on Makar Sankranti Know Importance and history of India Oldest Sun Temple Bihar | मकर संक्रांति पर इस सूर्य कुंड में स्नान से मिट जाते हैं सारे पाप, खास है बिहार का देव सूर्य मंदिर


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मकर संक्रांति का पर्व आने वाला है. शास्त्रों में मकर संक्रांति से उत्तरायण काल शुरू हो जाता है और इस दिन से देवताओं का दिन माना गया है. इस दिन बिहार के प्राचीन देव सूर्य मंदिर में काफी भीड़ देखने को मिलती है. यहां पर एक कुंड भी है, जहां इस दिन स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. आइए जानते हैं सूर्यदेव के इस मंदिर के बारे में…

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मकर संक्रांति पर इस कुंड में स्नान से मिट जाते हैं सभी पाप, जानें क्यों है खास

Surya Kund On Makar Sankranti: 15 जनवरी दिन गुरुवार को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों और तरीकों से मनाया जाने वाला मकर संक्रांति का त्योहार भगवान सूर्य से जुड़ा है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे गोचर उत्तरायण भी कहते हैं. सूर्य की स्थिति परिवर्तन करियर से लेकर स्वास्थ्य तक को प्रभावित करती है. ऐसे मौके पर भक्त सूर्य देव की उपासना करने के लिए सूर्य मंदिरों में जाते हैं, लेकिन बिहार में सूर्य को समर्पित एक विशाल और प्राचीन मंदिर है, जहां मकर संक्रांति के दिन अच्छी खासी भीड़ देखी जाती है. यहां पर एक प्राचीन कुंड भी है, बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन इस कुंड में स्नावन करने से सभी कष्ट व परेशानियों से मुक्ति मिलती है.

भगवान सूर्य का प्राचीन मंदिर
बिहार के औरंगाबाद जिले के पास प्राचीन देव सूर्य मंदिर स्थित है, जहां मकर संक्रांति और छठ पूजन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है. भगवान सूर्य का ये प्राचीन मंदिर हिंदू भक्तों के लिए एक दिव्य स्थान है. यहां भगवान सूर्य की सूर्योदय के साथ-साथ सूर्यास्त के दौरान पूजा की जाती है. मकर संक्रांति और छठ पूजा के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है. मकर संक्रांति के दिन भक्त मंदिर के ही पवित्र कुंड में स्नान करते हैं और उगते सूर्य की उपासना करते हैं. स्थानीय मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन कुंड में स्नान और पूजन से सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है और आने वाला समय खुशियों से भरा रहता है.

मंदिर के प्रांगण में एक कुंड
मंदिर के प्रांगण में एक कुंड भी है, जहां सालभर पानी भरा रहता है, चाहे मौसम कैसा भी हो. भक्त मकर संक्रांति के दिन पहले सूर्य कुंड में स्नान करते हैं और उसके बाद मंदिर के गर्भगृह में जाकर सूर्य की उपासना करते हैं. माना जाता है कि मंदिर का कुंड औषधीय गुणों से भरपूर है और स्नान से सभी शारीरिक कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है.

मकर संक्रांति के दिन मंदिर में मार्तंड महोत्सव
मकर संक्रांति के दिन मंदिर में ‘मार्तंड महोत्सव‘ जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जाते हैं, जो पूरी तरह सूर्य भगवान को समर्पित होते हैं. इसमें लोक और साहित्य कला और नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है. इसके साथ ही भक्तों के लिए मेले का आयोजन भी होता है. बात अगर मंदिर की करें तो मंदिर के निर्माण को त्रेतायुग का बताया जाता है, जबकि एएसआई इसे पांचवीं से छठी शताब्दी का बना बताते हैं, जिसपर गुप्तकालीन शैली और वास्तुकला की छटा देखने को मिलती है. हर साल मकर संक्रांति पर लाखों की संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.

मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति सनातन धर्म का एक महापर्व है, जो सूर्य की गति पर आधारित है. यह पर्व अंधकार से प्रकाश और अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर होने का प्रतीक है. जिस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है. यह दिन उत्तरायण की शुरुआत करता है. सूर्य का मार्ग दक्षिण से उत्तर की ओर हो जाता है, यह खगोलीय घटना हर वर्ष लगभग 14 या 15 जनवरी को होती है. इसलिए मकर संक्रांति को सूर्य पर्व भी कहा जाता है.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें

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