सईम ने अफसर बनने के लिए छोड़ दी लाखों की सैलरी वाली जॉब, फिर बिना कोचिंग क्रैक कर दिया UPSC एग्जाम


सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरा करने का जूनून दिल में हो. मुजफ्फरपुर के सईम रजा की कहानी इसी बात का जीता-जागता उदाहरण है. एक ऐसा लड़का जिसने करोड़ों की नौकरी और आरामदायक जिंदगी छोड़ दी, सिर्फ इसलिए कि उसने खुद से किया वादा निभाना था.  अपने देश और लोगों की सेवा करना. आज सईम रजा IPS अधिकारी हैं और उनकी कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहा है.

सईम रजा का जन्म मुजफ्फरपुर में हुआ. उनके पिता, मुनावर रजा, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में नौकरी करते थे और माता गृहिणी हैं. उनके माता-पिता ने हमेशा सईम की पढ़ाई और निर्णयों में उनका समर्थन किया. जब सईम ने लाखों की नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने का निर्णय लिया, तो उनके माता-पिता ने न सिर्फ उनका भरोसा किया, बल्कि पूरी तरह से उनका साथ दिया.

डेटा साइंटिस्ट की नौकरी और आरामदायक जिंदगी

सईम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुजफ्फरपुर से की और आगे बीटेक के लिए बेंगलुरु चले गए. बेंगलुरु की एक बड़ी टेक कंपनी में उन्हें डेटा साइंटिस्ट के पद पर नौकरी मिली, जिसमें उनका सालाना पैकेज 12 लाख रुपये था. आरामदायक नौकरी और सम्मानजनक पद होने के बावजूद, सईम के दिल में एक अलग ही इच्छा जगी वह समाज और लोगों की भलाई के लिए कुछ करना चाहते थे.

कोविड ने बदल दी जिंदगी की दिशा

कोविड के समय, सईम अपने माता-पिता के पास लौट आए. घर लौटने के बाद भी उन्होंने वर्क फ्रॉम होम जॉब जारी रखी, लेकिन मन में बस एक ही ख्याल था – समाज की सेवा करना. लाखों की सैलरी और आरामदायक नौकरी के बावजूद, वे संतुष्ट नहीं थे. तभी उन्होंने फैसला किया कि अब उनकी जिंदगी का मकसद सिर्फ पैकेज नहीं, बल्कि देश सेवा होगा.

बिना कोचिंग, घर बैठे शुरू हुई तैयारी

सईम ने अपने माता-पिता से इस निर्णय के बारे में बात की. पिता की सहमति और माता के आशीर्वाद से उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. उन्होंने न किसी कोचिंग का सहारा लिया और न ही किसी बड़ी किताब की बजाय खुद को समझाया और खुद को तैयार किया. तीन साल तक दिन-रात मेहनत, रिवीजन और आत्मविश्वास के साथ UPSC की तैयारी करते रहे.

UPSC में सफलता और IPS बनने की कहानी

साल 2023 में सईम ने पहली बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी और 188वीं रैंक हासिल की. जनरल कैटेगरी में इतनी उच्च रैंक पाकर उन्होंने IPS बनने का सपना पूरा किया. अब वह अपने गृह राज्य बिहार में कैडर पाए और देश की सेवा में जुट गए. उनकी मेहनत और दृढ़ निश्चय आज हर युवा के लिए प्रेरणा बन गया है.

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