नेहरू-गांधी परिवार का जिक्र कर ट्रेंड हुए BJP सांसद निशिकांत दुबे, सोशल मीडिया यूजर्स के बीच जूतमपैजार
संसद के भीतर होने वाली बहसें कई बार सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि बाहर निकलकर सोशल मीडिया की सबसे बड़ी बहस बन जाती हैं. ऐसा ही नजारा बुधवार को लोकसभा में देखने को मिला, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कही गई कुछ टिप्पणियों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी. सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पहले से चल रहे टकराव के माहौल में यह बहस और तीखी हो गई, जिसका असर यह हुआ कि कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा. अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी जोरदार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
निशिकांत दुबे के बयान से संसद में बवाल
बुधवार दोपहर करीब 2 बजे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार को लेकर कड़े शब्दों में अपनी बात रखी. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कुछ प्रकाशित पुस्तकों का हवाला देने की कोशिश की. दुबे ने कहा कि सदन में जिन पुस्तकों की चर्चा हो रही है, उनमें से कुछ कभी प्रकाशित ही नहीं हुईं, जबकि उनके पास ऐसे कई प्रकाशित ग्रंथों के संदर्भ हैं, जिनमें कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं को लेकर आलोचनात्मक विवरण मौजूद हैं.
नेहरू और गांधी को लेकर दिया विवादित बयान
अपने भाषण के दौरान दुबे ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी से जुड़ी पुस्तकों का उल्लेख किया और कहा कि इन किताबों में उस दौर की राजनीति, सत्ता संचालन और विवादों का जिक्र मिलता है. उन्होंने एम ओ माथाई, संजय बारू और अन्य लेखकों की किताबों का नाम लेते हुए आपातकाल, बोफोर्स विवाद और मितरोखिन आर्काइव जैसे मुद्दों की ओर भी इशारा किया. इस दौरान उन्होंने कुछ अंश उद्धृत करने की इच्छा जताई, जिस पर सदन के अध्यक्ष की ओर से बार-बार हस्तक्षेप किया गया.
राहुल गांधी के किताब पढ़ने से शुरू हुआ है पूरा विवाद
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला दिया था जिससे संसद में विवाद हो गया था. उस मामले में भी सदन के भीतर नियमों और संदर्भों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली थी. ऐसे में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगा रहे हैं.
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इंटरनेट पर मचा जूतमपैजार
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ यूजर्स इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ लोग संसद की गरिमा और मर्यादा का सवाल उठा रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…बीजेपी हमेशा पिछला रोना शुरू कर देती है. एक और यूजर ने लिखा…इस तरह से पिछले लोगों की बातें करके आप केवल समय खराब कर रहे हो.
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