2019 में ट्रैफिक नियमों में कुछ बदलाव हुए थे. उस समय, एक्ट में संशोधनों के बाद कई फर्जी दावे वायरल हुए. जैसे स्लिपर्स में ड्राइविंग पर 1000 रुपये का जुर्माना आधी बाजू की शर्ट पहनना, लुंगी-बनियान में गाड़ी चलाना, गाड़ी में एक्स्ट्रा बल्ब न रखना और गंदा शीशा होने पर चालान होना? आइए, जानते हैं कि हकीकत क्या है?
क्या कहता है नियम?
मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 और इसके नियमों को देखें तो धारा 129 में हेलमेट और सीट बेल्ट जैसी अनिवार्यताओं का जिक्र है, लेकिन फुटवियर को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. धारा 184 खतरनाक ड्राइविंग को लेकर है, जिसमें अगर कोई फुटवियर ड्राइवर की कंट्रोल को प्रभावित करता है और दुर्घटना का कारण बनता है, तो जुर्माना लग सकता है.पहली बार 1000 रुपये और दूसरी बार 2000 रुपये तक.
हालांकि, सिर्फ चप्पल पहनने के आधार पर चालान नहीं कट सकता. कई राज्यों में ट्रैफिक पुलिस कभी-कभी गलतफहमी से चालान काट देती है, लेकिन इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है. उदाहरण के लिए, अगर स्लिपर्स फिसलकर ब्रेक पैडल में फंस जाएं, तो ये खतरनाक ड्राइविंग माना जा सकता है, लेकिन सामान्य स्थिति में नहीं. अगर कोई पुलिसकर्मी गलत चालान काटे, तो आप ई-चालान पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं या कोर्ट जा सकते हैं.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
कानूनी रूप से कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन सेफ्टी का ख्याल रखते हुए हमें चप्पल पहनकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए. चप्पल आसानी से फिसल सकती हैं, पैडल पर ग्रिप कम हो सकती है और इमरजेंसी ब्रेकिंग में समस्या आ सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट्स के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में फुटवियर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
भारत में हर साल लाखों दुर्घटनाएं होती हैं और छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े हादसों का कारण बनती हैं. ट्रैफिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि ड्राइवरों को बंद जूते या सैंडल पहनने चाहिए, जो अच्छी ग्रिप प्रदान करें. अगर आप चप्पल में ड्राइव करते हैं, तो सतर्क रहें. कानून आपका साथ देगा, लेकिन सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है.
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