नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित जेईई-मेन्स जनवरी सत्र के परिणामों ने एक बार फिर शिक्षा नगरी ‘कोटा’ की श्रेष्ठता सिद्ध कर दी है. इस साल के परिणामों में कोटा के कोचिंग संस्थानों का दबदबा साफ नजर आ रहा है, जहां देश के टॉप-12 (100 पर्सेंटाइल) छात्रों में से 7 छात्र अकेले कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से जुड़े हैं. आपको बता दें कि कल ही एनटीए ने जेईई मेन का रिजल्ट घोषित किया है.
कोटा कोचिंग ने लहराया परचम
कोटा स्थित प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान एलेन (ALLEN) के सीईओ नितिन कुकरेजा के अनुसार, संस्थान के छात्र कबीर छिल्लर ने 300 में से 300 अंक प्राप्त कर 100 पर्सेंटाइल के साथ इतिहास रचा है. यह एक ‘परफेक्ट स्कोर’ है, जो कबीर की असाधारण प्रतिभा और सटीक तैयारी को दर्शाता है. आपको बता दें कि जेईई मेन परीक्षा पास करने वाले छात्रों को जेईई एडवांस में बैठने का मौका मिलेगा जो भारत के टॉप इंजीनियरिंग संस्थान में दाखिले के लिए आयोजित किया जाता है.
जुड़वां भाइयों की ‘समान’ सफलता बनी चर्चा का विषय
इस परिणाम में सबसे ज्यादा सुर्खियां ओडिशा (भुवनेश्वर) के 17 वर्षीय जुड़वां भाइयों, महरूफ अहमद खान और मशरूर अहमद खान ने बटोरी हैं. दोनों भाइयों ने न केवल 99.99 पर्सेंटाइल जैसा शानदार स्कोर हासिल किया, बल्कि दोनों ने एक ही शिफ्ट में परीक्षा दी और दोनों के अंक भी समान रहे. दोनों को 300 में से 285 अंक मिले हैं. दोनों भाई पिछले तीन साल से कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहे हैं. वे साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं और एक-दूसरे को लगातार प्रेरित करते हैं. परिवार के अनुसार दोनों की दिनचर्या,पढ़ने का तरीका,यहां तक कि चश्मे का नंबर और जूतों का साइज भी लगभग एक जैसा है.
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बच्चों की पढ़ाई के लिए मां ने छोड़ा डॉक्टर का पेशा
बच्चे अकेलापन महसूस न करें,इसलिए उनकी मां डॉ. जीनत बेगम ने अपना मेडिकल पेशा छोड़ दिया और कोटा में बच्चों के साथ रहने लगीं. उनका कहना है कि दोनों बच्चे शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे रहे हैं. इंजीनियर बनने का सपना उनका अपना था, इसलिए परिवार ने कभी उन पर दबाव नहीं डाला. परिवार के अनुसार जब दोनों भाइयों ने ओलंपियाड और कोटा के गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों के बारे में जाना तो उन्होंने भी कोटा आकर तैयारी करने की जिद की. तभी से वे कोटा में रहकर मेहनत कर रहे हैं और अब उनकी मेहनत का फल सामने है. जेईई-मेन्स के इस परिणाम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मेहनत,सही मार्गदर्शन और परिवार का साथ हो तो सफलता जरूर मिलती है.
स्टोरी- दिनेश कश्यप
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