भारत में EV खरीदना अब पहले से आसान हो गया है. MG Motor India के BaaS मॉडल की सफलता के बाद Tata Motors और Maruti Suzuki भी इस रेस में उतर चुके हैं. कम अपफ्रंट कीमत, अलग बैटरी EMI और सस्ती शुरुआत. क्या ये सच में EV मार्केट को बदल देगा? पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

BaaS Scheme
इंडियन EV मार्केट में अब असली क्रांति शुरू हो गई है. MG Motor India ने 2024 में Windsor EV के साथ बैटरी एज ए सर्विस (BaaS) पेश करके दिखा दिया कि EV को महंगा बनाने वाली बैटरी की समस्या को कैसे सुलझाया जा सकता है. अब Tata Motors और Maruti Suzuki भी उसी राह पर दौड़ पड़े हैं. फरवरी 2026 में दोनों कंपनियों ने BaaS के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां लॉन्च की हैं. सवाल यह है कि क्या इससे EV मार्केट पूरी तरह बदल जाएगी?
MG ने BaaS को मेनस्ट्रीम बनाया. Windsor EV की फुल कीमत करीब ₹14 लाख है, लेकिन BaaS पर सिर्फ ₹9.99 लाख + ₹3.9 प्रति किमी बैटरी चार्ज रह जाता है. Comet EV ₹4.99 लाख + ₹3.2/km से शुरू होती है नतीजा क्या है? अपफ्रंट कॉस्ट में 4-5 लाख की बचत, बैटरी डिग्रेडेशन या रिप्लेसमेंट की टेंशन जीरो.शायद इस वजह से ही Windsor EV भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली EV बन गई. क्या टाटा और मारुति भी ऐसा कर पाएगी? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.
टाटा की ‘ट्विन ईएमआई’ स्कीम
Tata ने 20 फरवरी 2026 को Punch EV facelift लॉन्च की है. 40 kWh बैटरी, रियल वर्ल्ड 355 km रेंज देने में सक्षम है. नॉर्मल प्राइस ₹9.69 लाख है, लेकिन इसे BaaS के साथ मात्र ₹6.49 लाख में खरीदा जा सकता है, जिसमें ₹2.6/km के हिसाब के बैटरी का किराया अलग से देना होगा. टाटा इसे ‘twin EMI’ कह रहा है, जिसमें कार की EMI अलग और बैटरी की अलग है. छोटे शहरों और मिडिल क्लास के लिए ये गेम चेंजर साबित हो सकता है.
Maruti Suzuki ने 18 फरवरी को अपनी पहल इलेक्ट्रिक कार eVitara उतारी. बेस वेरिएंट की फुल कीमत ₹15.99 लाख है, लेकिन BaaS के साथ इसे मात्र ₹10.99 लाख में खरीदा जा सकता है, जिसमें ₹3.99/km के हिसाब से बैटरी का रेंट देना होगा. बड़े 61 kWh वेरिएंट पर ये किराया बढ़कर ₹4.39/km हो जाएगा. अपफ्रंट में सीधे तौर पर ₹5 लाख तक की बचत दिखती है. मारुति का बड़ा सर्विस नेटवर्क और ब्रांड का भरोसा इसे और पॉपुलर बना सकता है.
BaaS क्यों है गेम चेंजर?
भारत में EV की सबसे बड़ी रुकावट अपफ्रंट लागत है. BaaS स्कीम इसे काफी हद तक हल कर देती है. खरीदार सिर्फ कार खरीदता है. बैटरी किराए पर रहती है. लंबे समय में भी 80,000-1 लाख km तक अपफ्रंट बचत बैटरी चार्ज को कवर कर लेती है. रिसेल वैल्यू बेहतर है, क्योंकि बैटरी अलग है। ये फॉर्मूला ईवी को ICE कार खरीदने जितना आसान और सस्ता बना देता है.
दिक्कत कहां आएगी?
हालांकि, ये इतना भी आसान काम नहीं है. कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. ज्यादा km चलाने वालों को मंथली बिल महंगा पड़ सकता है. चार्जिंग इंफ्रा अभी कमजोर, लंबी ट्रिप मुश्किल है. हालांकि सरकारी स्कीम, फास्ट चार्जिंग स्टेशन और कंपनियों का आक्रामक प्लान इनको दूर कर सकेगा.
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