रोटियां गिनकर बनाना क्यों अशुभ माना जाता है
वास्तु मान्यताओं में अन्न को समृद्धि और जीवन का आधार माना गया है. जब हम रोटियां गिनकर बनाते हैं, तो यह संकेत देता है कि घर में अन्न सीमित है और हर चीज मापकर करनी पड़ रही है. यह सोच धीरे-धीरे कमी के भाव को मजबूत करती है. मान्यता है कि अन्नपूर्णा और लक्ष्मी उसी घर में स्थिर रहती हैं जहां अन्न को खुले मन से स्वीकार किया जाता है. रोटियां गिनना या अन्न को गिनना उनके प्रति अनादर जैसा माना जाता है. इसी वजह से परंपरा में कहा जाता है कि हमेशा थोड़ी अतिरिक्त रोटियां बननी चाहिए, ताकि घर में बरकत बनी रहे.
रोटियों से जुड़ी छोटी आदतें भी असर डालती हैं
अक्सर लोग सोचते हैं कि रोटियां गिनना तो सिर्फ व्यावहारिक आदत है, इससे क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन मान्यताओं के अनुसार अन्न के प्रति व्यवहार का असर मानसिकता और माहौल पर पड़ता है.
जब घर में हर चीज गिनकर की जाती है, तो अनजाने में परिवार में अभाव की सोच बढ़ती है. लोग खर्च से डरने लगते हैं, बचत भी टिकती नहीं और मन में असुरक्षा रहती है. वहीं जहां अन्न को पर्याप्त माना जाता है, वहां संतोष और विश्वास की भावना मजबूत रहती है.
घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के रसोई नियम
1. हमेशा 1-2 रोटियां ज्यादा बनाएं
यह बरकत का संकेत माना जाता है. बची रोटी कभी बेकार नहीं जाती-उसे पशु या जरूरतमंद को दिया जा सकता है.
2. पहली रोटी गाय के लिए रखें
परंपरा में इसे बहुत शुभ माना गया है. इससे दान का भाव बढ़ता है और घर में शांति बनी रहती है.
3. बची रोटी फेंकें नहीं
अन्न का अपमान माना जाता है. जरूरतमंद, पक्षी या पशु को देना बेहतर माना गया है.
4. खाना बनाते समय मन शांत रखें
मान्यता है कि रसोई की ऊर्जा पूरे घर में फैलती है. गुस्से या तनाव में बना भोजन नकारात्मक असर डाल सकता है.
रसोई से जुड़े कुछ और वास्तु नियम
1. चकले की आवाज से बचें
रोटी बेलते समय चकले की तेज खट-खट आवाज को अशुभ माना जाता है. चकले के नीचे कपड़ा रखने से आवाज कम होती है.
2. बासी आटा इस्तेमाल न करें
गूंथा आटा लंबे समय तक फ्रिज में रखना परंपरा में सही नहीं माना गया. रोज ताजा आटा गूंथना बेहतर बताया गया है.
3. तवा साफ और सूखा रखें
गर्म तवे पर पानी डालना अशुभ माना जाता है. इससे दरार या नुकसान भी हो सकता है, इसलिए तवे को धीरे ठंडा होने दें.
4. पूर्व दिशा की ओर मुख रखकर खाना बनाएं
मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य और सकारात्मकता बनी रहती है.
क्या सच में रोटियां गिनना दरिद्रता लाता है?
यह समझना जरूरी है कि वास्तु मान्यताएं प्रतीकात्मक होती हैं. रोटियां गिनना सीधे आर्थिक समस्या का कारण नहीं बनता, लेकिन यह सोच को प्रभावित कर सकता है. जब घर में हर चीज सीमित मानकर की जाती है, तो मानसिकता भी संकुचित होती है. इसके उलट जब अन्न को पर्याप्त माना जाता है, तो मन में संतोष और भरोसा रहता है. यही वजह है कि परंपरा में अतिरिक्त रोटी बनाने की सलाह दी गई है. इसे बरकत का प्रतीक माना जाता है, न कि बर्बादी का.
संतुलन कैसे रखें
-आज के समय में भोजन बचाना भी जरूरी है और अन्न का सम्मान भी. इसलिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि जरूरत के अनुसार बनाएं लेकिन 1-2 रोटियां अतिरिक्त रखें, अगर बच जाएं तो उन्हें सही जगह उपयोग करें.
-इस तरह न अन्न की बर्बादी होगी, न अभाव की सोच बनेगी. परंपरा का भाव भी बना रहेगा और व्यवहारिकता भी.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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