चैत्र नवरात्रि 2026 प्रसिद्ध बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर 600 साल पुराना इतिहास | अनोखा है 600 साल पुराने बुढ़िया माई मंदिर का इतिहास, यहां है अकाल मृत्यु

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बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर: इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ और 27 मार्च को समाप्त हो रही है। चैत्र नवरात्रि का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी है। यह पर्व नारी शक्ति का प्रतीक है और समाज में महिलाओं की भूमिका और सम्मान को शामिल करता है। चैत्र नवरात्रि के मंत्र पर आज हम आपको मातारानी के ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं, जहां अकाल मृत्यु के संकट से मुक्ति की अवधारणा है…

अनोखा है 600 साल पुराने बुढ़िया माई मंदिर का इतिहास, हर दर्शन होता है दूरज़ूम

बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और शक्तिपीठ और सिद्धपीठ पीठ में नव दुर्गा के पूजन की तैयारी शुरू हो गई है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र नवरात्रि के दौरान, भक्तगण मां दुर्गा की नौ सिद्धांतों की पूजा की जाती है। व्रत और उपवास का पालन किया जाता है और विशेष पूजा, घर और कन्या पूजन का आयोजन होता है। नवरात्रि के पवित्र मंत्र पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं, जहां मृत्यु से पहले की चेतावनी मिलती है और यह सब मां दुर्गा के आशीर्वाद से संभव है। ऐये जानते हैं माता रानी के इस पवित्र मंदिर के बारे में…

चमत्कारी एवं सिद्धपीठ मंदिर
प्राचीन में मां भगवती के कई चमत्कारी और सिद्धपीठ मंदिर मौजूद हैं, भक्तों को माता रानी की चौखट तक खींची जाती है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जो माता रानी की चौखट से पहले बताती है? यूपी के गोरखपुर में है ऐसा मंदिर, जो होने वाली घटना के बारे में बताते हैं.

बुढ़िया माई मंदिर काल का मंदिर
गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में स्थित है बुढ़िया माई मंदिर, जो गोरखपुर जिले से 12 किलोमीटर दूर है। जंगल के बीच-बीच में होने के बावजूद भी मंदिरों में नवरात्रि के भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि सिद्धपीठ में शामिल बुढ़िया माई मंदिर काल का मंदिर है, जो अकाल मृत्यु को टालने की क्षमता रखता है और इसके साक्ष्य मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा है। स्थानीय लोक जादूगरों की जादूगरी तो मंदिर के पास एक पुल हुआ था, जो बड़े पैमाने पर नदी पर बना था। बराक के पास एक दिन की बारात ग्यान रुकी। वहां सफेद बारात में मौजूद बुढ़िया ने ग्यान पुल पर न जाने की सलाह दी, लेकिन बारात के लोग नहीं माने। जैसे ही बारात पुल के बीच-बीच का ढलान, पुल टूटने से गिर गया और सभी बारातियों की मौत हो गई।

बुढ़िया माई का मंदिर मौजूद
स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्यवाणी के बाद बुद्धिया कहां खो गया, किसी को पता नहीं चला। इसके बाद भी जंगल में रहने वाले जनजातीय लोगों ने एक महिला को देखा, लेकिन वह एक पल में ओझल हो गई थी। इसी पुल के पास आज भी मौजूद है बुढ़िया माई का मंदिर।

600 साल पुराना है मंदिर
600 साल पुराना है मंदिर, लेकिन आस्था से प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री भी नहीं हैं साधू? सीएम योगी कई बार यहां के मंदिरों के दर्शन के लिए जाते हैं। नवरात्रि के समय मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं, और भक्त मनोभाव के लिए पैदल जंगल की यात्रा भी करते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को एक बड़ी नदी भी पार करनी होती है, जिसके लिए नाव का प्रबंधन रहता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए शहर के मोहोद्दीपुर से आटो या जीप जैसे वाहनों का सहारा लिया जा सकता है। वाहन आपको एयरपोर्ट होते हुए कुसम्ही जंगल पहुंचाएगा।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

पराग शर्मा

पैरा शर्मा एक अनुभवी धर्म और ज्योतिष विद्वान हैं, जिनमें भारतीय धार्मिक संप्रदाय, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव शामिल है…और पढ़ें



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