फरवरी 2026 में ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री 47% सिर्फ 3,968 यूनिट रही, जो चार साल का सबसे निचला स्तर है। कभी ई-स्कूटर मार्केट की लीडर रही कंपनी अब टॉप-5 से भी बाहर हो गई है। विक्रय मार्केट शेयर, शेयर बाजार में भारी गिरावट और जनसंख्या वृद्धि के बीच कंपनी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

ओला इलेक्ट्रिक
एक समय ओला इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक टू-चांचर प्लाजा की बेताज बादशाह थी। मार्च 2024 में उसने 53,646 यूनिट्स का पीक रिकॉर्ड बनाया था और कई महीनों में 30,000-40,000 यूनिट्स की बिक्री जारी थी। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह उलट गई है। कंपनी का मार्केट शेयर मार्केट 3.7 प्रतिशत जारी किया गया है और वह टॉप-5 कंपनी की सूची से बाहर हो गई है। ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (एम्पीयर ब्रांड) ने 4,725 यूनिट्स बेचकर ओला पर कब्जा कर लिया है।
टीवीएस का जलवा पार्टिकल!
इस दौरान कुल इलेक्ट्रिक टू-शिक्षक बाजार भी 9 प्रतिशत प्रोजेक्टर लगभग 1.01 लाख इकाइयां बढ़ीं। टीवीएस मोटर कंपनी ने 29.4 प्रतिशत शेयर के साथ लीडरशिप कायम रखी। बजाज ऑटो दूसरे स्थान पर रही, जबकि एथर एनर्जी ने 20,585 यूनिट्स (19.1 प्रतिशत शेयर) और हीरो मोटोकॉर्प ने 12,516 यूनिट्स की मजबूत बिक्री दर्ज की।
बिक्री में आई इस भारी गिरावट का सीधा असर ओला इलेक्ट्रिक के शेयर पर पड़ा। सोमवार को कंपनी के शेयर रिकॉर्ड लो लेवल ₹21.21 पर पहुंच गया, जो एक दिन में 16 प्रतिशत की गिरावट है। स्टॉक अपने पीक से करीब 86 फीसदी नीचे है और मार्केट कैप करीब ₹10,500 करोड़ रह गई है। निवेशक पूरी तरह से डगमगा गया है।
मोबाइल रिसेट कर रही कंपनी
कंपनी ‘ऑस्ट्रेलियाई रिसेट’ की प्रक्रिया चल रही है। स्ट्रेंथ स्टोर नेटवर्क को 700 से लेकर 550 तक करने की योजना है। तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में राजस्व 55 प्रतिशत प्रतिशत ₹470 करोड़ रहा, जबकि शुद्ध घाटा ₹487 करोड़ रहा (पिछले साल से कम) हो गया है। ओला की कीमत में 50 प्रतिशत तक की कटौती हो रही है। साथ ही लाइक्स के अलावा ‘शक्ति’ नाम का रेसिडेंशियल बैटरी बैटरी स्टोरेज सिस्टम लॉन्च करके डाइवर्स इंस्टालेशन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
क्या होगा?
ग्राहकों का मानना है कि सर्विस नेटवर्क की पुरानी बातें, बहुआयामी और कंज्यूमर ट्रस्ट में कमी मुख्य कारण हैं। हालांकि कंपनी के फाउंडर भाविश अग्रवाल का कहना है कि ये छोटे दौर का है और लंबे समय से ओला स्ट्रॉन्ग रिटर्न कंपनी है। बैचलर बनी बनी हुई हैं और बाजार में ओला की एक बार फिर से लीडर बनने की राह मुश्किल नजर आ रही है।
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