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सूरत के शिवम मौर्य, गुरप्रीत अरोरा और गणेश पटेल ने जुगल से एआई-पावर्ड सुपरबाइक गरुड़ का निर्माण किया, जिसमें रास्पबेरी पाई, हबलेस व्हील्स और 220 किमी रेंज की खूबियां हैं। बाइक का लगभग 50 प्रतिशत भाग फेंड में दिए गए मेटल पार्ट्स और रिज्ड कंपोनेंट्स से तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट में तीन करोड़पति ने करीब 1.8 लाख रुपये का निवेश किया है।

नई दिल्ली. सूरत के तीन इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग के छात्रों ने इनोवेशन और इंजीनियरिंग का शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘गरुड़’ नाम की एक एआई-पावर्ड इलेक्ट्रिक सुपरबाइक तैयार की है, जिसमें ज्यादातर बर्गर और रिसाइकल किए गए पुर्जों का निर्माण किया गया है। भारत की पहली फिल्म इंटीग्रेटेड सुपरबाइक के रूप में इस डॉक्यूमेंट्री ने अपने भविष्य के वैज्ञानिक डिजाइन और तकनीक के कारण सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं। भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के शिवम मौर्य, गुरप्रीत अरोड़ा और गणेश पैनल ने मिलकर गरुड़ को तैयार किया है, जिसमें आर्टिस्टिक सियाया, सस्टेनेबिलिटी और प्रैक्टिकल इंजीनियरिंग का बेहतरीन मेल देखने को मिलेगा। बाइक का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा नकली धातु के घटकों और प्रयुक्त कम्पोनेंट्स से बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट में त्रिने ने करीब 1.8 लाख रुपये का निवेश किया है।
गरुड़ के केंद्र में एक रास्पबेरी पाई मॉडल है, जो सेंट्रल माउंटेन यूनिट है। यह छोटे कंप्यूटर बाइक में स्मार्ट फीचर्स को पावर देता है, जिससे यह वाॅयस कमांड पर बैकलैश कर सकता है, स्पीड को ऑटोमेटिकली कंट्रोल कर सकता है और बिना नाममात्र ब्रेकिंग के पूरी तरह से रोक भी सकता है। वाई-फाई से जुड़े इस सिस्टम को ‘धीमा करो’ या ‘इतनी दूरी पर रुक जाओ’ जैसे कमांड्स भी समझ सकते हैं।
होटल असिस्टेड कोलिजन एविएटर्स सिस्टम
गरुड़ में राइडर की सुरक्षा के लिए स्माल्ट असिस्टेड कॉलिजन एविएटर्स सिस्टम भी दिया गया है। बाइक पर लगे दो हाई-रेंज सेंसर कॉन्स्टेंट रोड को स्कैन करते रहते हैं। अगर किसी वाहन में 12 फीट के हिस्से में आता है तो बाइक खुद-ब-खुद स्पीड कम कर देती है और अगर तीन फीट के अंदर कोई विशिष्टता नहीं है तो गरुड़ पूरी तरह से रुक जाता है। यह सिस्टम ‘थ्री फीट पर स्टॉप गो’ जैसा कि वाइस्ड कमांड्स पर भी काम करता है, जो ऑटोनॉमस टू-चार्चर स्टूडेंट टेक्नॉलॉजी की झलक देता है।
ये फीचर्स भी मजाद
यह इलेक्ट्रिक बाइक एक और प्रकृति की है जिसमें हबलेस व्हील्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे बाजार में अन्य दोपहिया समाज से अलग-अलग कंपनियों में पेश करता है। इनमें से किसी को फ्रेंचाइजी पाइप्स से बने फ्रेम पर राइट कर जोड़ा गया है। इनमें कई बैक फीचर्स भी दिए गए हैं, जैसे टचस्क्रीन डिस्प्ले, जिसमें वॉलपेपर नेविगेशन, फोन और म्यूजिक प्ले की सुविधा है। आगे और पीछे के कैमरे लगे हुए हैं, जो लाइव वीडियो वीडियो पर प्रदर्शित होते हैं, जिससे शहरी निगम में विजिबिलिटी बेहतर होती है। डिक्लेयर मोबाइल रीडेड पैड भी इसमें दिया गया है।
220 किलोमीटर की रेंज
इल्म-आयन बैटरी से चलने वाली गरुड़ एक बार फुल चार्ज होने पर ईको मॉड 220 किलोमीटर में और स्पोर्ट मॉड 160 किलोमीटर तक चल सकता है। इसे पूरी तरह से चार्ज करने में करीब दो घंटे लगे हैं। खैर यह एक प्रायोगिक परियोजना है, लेकिन इसमें तकनीकी गहराई और विलक्षणता दोनों की झलक है। गरुड़ के लीड वेल्क्रोम शिवम मौर्य, जो यूट्यूब चैनल पर इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग भी पसंद करते हैं, उन्होंने टीम के इस प्रोजेक्ट को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया, जिससे इसे डियोलॉजी मिली। उन्होंने इस इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग के संपूर्ण प्रोसेस और पब्लिक रोड पर परीक्षण के वीडियो भी शेयर किए हैं।
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