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Indian cricketer Vijay Bhardwaj Story: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर विजय भारद्वाज ने साल 1999 में अपना डेब्यू किया था. वह डेब्यू में ही अपने ऑलराउंड खेल से सनसनी मचा दी थी. डेब्यू में वह मैन ऑफ द सीरीज बने, लेकिन उसके बाद आंख की सर्जरी के कारण उनका करियर बर्बाद हो गया.

पूर्व भारतीय क्रिकेटर विजय भारद्वाज
नई दिल्ली: साल 1999 में भारतीय क्रिकेट टीम एलजी कप के लिए केन्या दौरे पर गई थी. इस टूर्नामेंट में भारत और केन्या के अलावा जिम्बाब्वे की टीम भी शामिल थी. इस सीरीज के लिए भारतीय टीम में विजय भारद्वाज नाम के एक खिलाड़ी का भी सिलेक्शन हुआ था. घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए खेलने वाले विजय अपनी स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी के लिए खूब मशहूर थे.
विजय ने घरेलू क्रिकेट में जिस तरह का नाम बनाया था उन्होंने अपने डेब्यू सीरीज में साबित भी कर दिया. एलजी कप में भारत बेशक चैंपियन नहीं बना था, लेकिन विजय भारद्वाज के रूप में उन्हें एक भारतीय क्रिकेट के लिए भविष्य का सितारा मिल गया. विजय भारद्वाज एलजी कप में मैन ऑफ सीरीज रहे. उन्होंने गेंदबाजी में चार मैचों में 10 विकेट लिए और बल्लेबाजी में पूरी सीरीज में नॉटआउट रहते ही 89 रनों का योगदान दिया, लेकिन पहली सीरीज में धूम मचाने के बाद से ही उनका बुरा वक्त शुरू हो गया.
स्लिप डिस्क के कारण डेढ़ साल बिस्तर पर रहे
एलजी कप में दमदार प्रदर्शन के बाद विजय को टीम इंडिया के टेस्ट टीम में भी शामिल कर लिया गया, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट और वनडे दोनों ही सीरीज में वह कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके. हालांकि, इसके बावजूद उन्हें ऑस्ट्रेलिया दौरे पर फिर मौका दिया गया. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच में दुर्भाग्य से उन्हें चोट लग गई.
इस चोट के कारण उन्हें स्लिप डिस्क हो गया और वह करीब डेढ़ साल तक बिस्तर पर रहे. फिट होने के बाद विजय ने मैदान पर वापसी की और घरेलू क्रिकेट में फिर से अपना दम दिखाया, जिससे वह भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे, लेकिन उनमें पहली जैसी चमक नहीं रही.
आंख की सर्जरी से करियर पर लगा फुल स्टॉप
टीम इंडिया में वापसी से पहले विजय जब स्लीप डिस्क से उबरे तो उन्हें किसी ने आंख की सर्जरी कराने की सलाह दी. विजय चश्मा पहनकर खेलते थे. उन्होंने अपनी आंखों की सर्जरी कराई, लेकिन ये पूरी तरह से सफल नहीं रहा. सर्जरी के बाद उनकी आंखों की रोशनी और कम हो गई, जिसके कारण उन्हें फील्डिंग के दौरान गेंद देखने में परेशानी होने लगी. ऐसे में उनके लिए आंख की वो सर्जरी उनके करियर के लिए घातक साबित हुआ.
आखिरी बार विजय भारद्वाज को साल 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलने का मौका मिला था, लेकिन उस मैच में वह पहली गेंद पर आउट हो गए. इसके बाद से फिर उन्हें टीम इंडिया के लिए कभी मौका मिला. इस तरह जिस खिलाड़ी को कभी भारत का सुपरस्टार कहा जा रहा था वो चोट और सर्जरी के कारण देखते ही देखते ही दुनिया की नजरों से ओझल हो गए.
कैसा रहा है विजय भारद्वाज का करियर
विजय भारद्वाज के करियर की बात करें तो वह भारत के लिए 3 टेस्ट और 10 वनडे मैचों में मैदान पर उतरे. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 28 रन बनाने के साथ 1 विकेट लिए. वहीं वनडे में उनके नाम 16 विकेट लेने के साथ उन्होंने 136 रन भी बनाए. वहीं, घरेलू क्रिकेट में विजय ने 96 फर्स्ट क्लास मैचों में 59 विकेट झटके और बल्लेबाजी में 5553 बनाए. इसके अलावा लिस्ट में उन्होंने 72 मैचों में 1707 रन बनाने के साथ 46 विकेट लेने का कारनामा किया.
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अक्टूबर 2025 से नेटवर्क 18 समूह में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत. पत्रकारिता में 9 साल का अनुभव. एबीपी न्यूज डिजिटल में स्पोर्ट्स बीट से करियर की शुरुआत। इंडिया टीवी और नवभारत टाइम्स ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित संस्…और पढ़ें
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