30 घंटे तक लाइन में हो रहे हैं भक्त, फिर होते हैं भगवान वेंकटेश के दर्शन, अगेन मंदिर में इतनी भीड़ क्यों?

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तिरूपति मंदिर: इन दिनों आस्था में भारी भीड़ सिर्फ समुद्र तट की वजह से ही नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों की वजह से भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है। 21 मई से नम्मालवार उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, जो वैष्णव परंपरा में बेहद खट्टी है। इस अवसर पर भगवान विष्णु और भगवान वेंकटेश्वर की भक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। भक्तों का मानना ​​है कि इस समय दर्शन और पूजा करने से आध्यात्मिक शांति, मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। अगर आप इस विषय पर स्टोरी बना रहे हैं तो यह एंगल काफी मजबूत है।

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देशी मंदिर भीड़

तिरूपति मंदिर: आंध्र प्रदेश के मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। समरसाइल की छुट्टियां, वीकेंड और छुट्टियों की बहुतायत संख्या इसकी बड़ी वजह है, लेकिन इसी दौरान धार्मिक कैलेंडर में कुछ खास उत्सव भी लोगों का ध्यान खींचते हैं। 21 मई से शुरू होने वाला नम्मालवार उत्सव ऐसा ही एक खास धार्मिक अवसर है, जिसे दक्षिण भारत की वैष्णव परंपरा में बहुत श्रद्धा से देखा जाता है। भगवान वेंकटेश्वर को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है, इस दौरान भक्त दर्शन को और सबसे ज्यादा शुभ मानते हैं। यही कारण है कि कई राक्षस इस समय दर्शन की योजना तोड़ रहे हैं और मंदिरों में भीड़ और वृद्धि हो रही है।

कौन थे नम्मालवार
नम्मालवार वैष्णव संत परंपरा के सबसे पूजनीय संतों में गिने जाते हैं। दक्षिण भारत में 12 अलवर संत हुए, जो भगवान विष्णु के महान भक्त माने जाते हैं। इन्हें नम्मालवार को बहुत ऊंचा स्थान दिया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से भगवान विष्णु की भक्ति को समर्पित कर दिया था। उनके भक्ति गीत और रचनाएँ आज भी मूर्तियों में गाई जाती हैं। वैष्णव परंपरा में उन्हें भगवान का परम भक्त और आध्यात्मिक मार्गदर्शक माना जाता है।

इस उत्सव में किसकी पूजा होती है
इस उत्सव का केंद्र भगवान विष्णु की भक्ति है। ड्रैगन में भगवान वेंकटेश्वर की पूजा होती है, जिसमें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है। इसलिए नम्मालवार उत्सव सीधे तौर पर भगवान वेंकटेश्वर की भक्ति से जुड़ता है। इस दौरान पेंटिंग में विशेष पूजा, भजन, शास्त्रीय पाठ और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त भगवान के सामने प्रार्थना करते हैं और जीवन की मूर्ति से मुक्ति की कामना करते हैं।

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क्यों माना जाता है यह समय अत्यंत शुभ
धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, जब किसी महान संत की स्मृति में उत्सव मनाया जाता है, तो उस समय पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है। भक्तों का मानना ​​है कि इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मकता कम होती है और जीवन में स्थिरता आती है। कई लोग इसे पूर्ण मन का भी शुभ समय मानते हैं। परिवार की सुख शांति, स्थिरता में स्थिरता और मानसिक संतुलन के लिए भी लोग इस समय दर्शन को महत्व देते हैं।

भक्तों को मिलने से क्या लाभ होता है
धार्मिक आस्था के कारण भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन से आर्थिक तनाव कम होने, मानसिक तनाव घटने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। नम्मालवार उत्सव के दौरान भक्ति करने से आध्यात्मिक पाइपलाइन मजबूत होती है। कई लोगों का मानना ​​है कि अगर सात्विक मन से प्रार्थना की जाए तो काम पूरा होने का आशीर्वाद मिलता है। हालाँकि यह पूरी तरह से आस्था का विषय है।

गाज़ियाबाद में इतनी बड़ी भीड़ का असली कारण क्या है
साफ तौर पर देखें तो असली भारी भीड़ की सबसे बड़ी वजह समर वेकेशन रश है। रोज़ हज़ारों रिज़ॉर्ट होटल रीच रह रहे हैं और इंतज़ार का समय काफी बढ़ गया है। मंदिर प्रशासन ने भी बिना समर्थकों वाले भक्तों से अपील की है कि वे भीड़ को देखते हुए सावधानी से यात्रा की योजना बनाएं. धार्मिक आयोजनों में लोगों की रुचि प्रमुख है, लेकिन इस समय की भीड़ का मुख्य कारण छुट्टियां और छुट्टियों का दबाव ज्यादा माना जा रहा है।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

मोहित मोहित

मीडिया इंस्टीट्यूट में 8+ साल का अनुभव, एबीपी, एनडीटीवी, डेली जर्नल और इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों से जुड़कर काम किया। लाइफस्टाइल, धर्म और संस्कृति की कहानियों को दिलचस्प खिलाड़ियों में पेश करने का खास शौक।…और पढ़ें

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