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नाइट व्हिस्लिंग मिथ: रात में सिटी वाद्ययंत्रों को लेकर भारत समेत कई देशों में अलग-अलग तरह के सिद्धांत प्रचलित हैं। वैज्ञानिक प्रमाण तो नहीं हैं, लेकिन इनके पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक सिद्धांतों की चर्चा अवश्य है।
रात्रि सीटी मिथक: रात की शहर आत्मा को क्या कहती है?
रात में सीटी बजने का मिथक: रात के समय सिटी मत बजाओ, नहीं तो कुछ अनहोनी होगी बचपन में बहुत से लोग ये बात कहते थे घर के बड़े-बुजुर्गों से जरूर सुनोगे। कुछ जगहों पर कहा जाता है कि इससे आत्माएं आकर्षित होती हैं, तो कहीं इसे जादुई मछली वाली आदत माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और अमेरिका के कई आदर्शों में भी रात में सेक्रेटिक वादकों को लेकर अलग-अलग तरह की लोक धारणाएँ मौजूद हैं।
आज के डिजिटल राउंड में जब हर का साइंटिस्ट कारण पता चला, तब भी ऐसी ही कुछ बातें लोगों के बीच बनी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या क्रांतिकारी रात में कलाकारों और सितारों के बीच कोई रिश्ता है, या इसके पीछे समाज और संस्कृति की कोई अलग कहानी है?
भारत से लेकर दुनिया तक क्यों फ़ोटो यह सही है?
भारत के कई राज्यों में रात में कलाकारों को अशुभ माना जाता है। ग्रामीण इलाक़ों में लोगों का मानना था कि अँधेरा होने के बाद असाध्य आवाज़ें आसपास की नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित कर सकती हैं। हालाँकि यह विश्वास धार्मिक और लोककथाओं पर आधारित है। लेकिन कोटा की बात ये है कि ऐसी सोच दुनिया के कई देशों में भी देखने को मिलती है.
जापान में ऐसा माना जाता है कि सांप या बुरी शक्तियां आती हैं
जापान में लंबे समय से यह धारणा चली आ रही है कि रात में शहर में सांप या अशुभ शक्तियां आकर्षित होती हैं। कुछ सांस्कृतिक शोधों में यह भी माना गया है कि पुराने समय में लोग रात को बाहर आरोहण से निकलने के लिए बच्चों के साथ ऐसी बातें करते थे।
कोरिया और फिलीपींस में अलग-अलग रूप
दक्षिण कोरिया में रात की सिटी की तस्वीरें या दुर्भाग्य से जुड़ गईं। वहीं फिलीपींस में कुछ जगहों पर ऐसा माना जाता है कि रात में सिटी बजाना भटकती स्पिर को हटाया जा सकता है। अमेरिका के कुछ स्थानीय पुरातात्विक स्थलों में भी ऐसी ही लोक विशिष्टताएँ मौजूद हैं, हालाँकि वहाँ यह विचार हर जगह समान नहीं था।
इसके पीछे कोई व्यावहारिक कीमत भी क्या हो सकती है?
लोक ईसाई को सिर्फ ईसाईयों द्वारा खारिज करना आसान होता है, लेकिन कई बार इनके पीछे सामाजिक कारण भी होते हैं। पुराने समय में रात का मतलब कम रोशनी, खतरा और सीमित सुरक्षा होता था। ऐसे लोगों में देर रात तक बाहर घूमना या अस्थैतिक शोर से भ्रमण के लिए कहानियों पर आधारित कहानियों का निर्माण किया गया है, यह धारणा कई सांस्कृतिक विशेषज्ञों की है। एक और दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सिटी की आवाज दूर तक है। शांति रात में यह लेख को चिंता कर सकता था या किसी खतरे का गलत संकेत बन सकता था।
डर, संस्कृति और इंसानी कल्पना का मेल
मानव समाज हमेशा एक नीरस को चित्र में बदलता रहता है जिसमें उसे पूरी तरह से समझ में नहीं आता है। रात, अजनबी और अंजनी आवाजें मिलकर कल्पना को मजबूत बनाती हैं। इसी कारण से चमत्कार, रहस्यमयी कहानियाँ और स्मारकों से जुड़ी कहानियाँ लगभग हर संस्कृति में मिलती हैं। आज भी कई लोग इन बातों पर विश्वास करते हैं, जबकि कई इसे सिर्फ सांस्कृतिक परंपरा पर विश्वास करते हैं। सच्ची इच्छा जो भी हो, इतनी तय है कि रात में सिटी प्लेयर वाली यह धारणा दुनिया की साझा लोक-स्मृतियों का दिलचस्प हिस्सा बन गई है। रात में संगीतमय संगीत पर आत्मा आने का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन यह अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक सोच, सामाजिक सांस्कृतिक और लोक कथाओं का रोचक उदाहरण जरूर है। कभी डर के लिए, कभी निर्देश के लिए और कभी रहस्य के लिए यह कहानी पैदल यात्रा तक।
लेखक के बारे में

मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकतों से लेकर धरती तक पहुंचना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। माइक के पीछे की ये जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्रो…और पढ़ें
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