
कंपनी ने मानेसर सुविधा में अपने मौजूदा बायोगैस संयंत्र की क्षमता को 0.2 टीपीडी से 0.7 टीपीडी तक विस्तारित किया है। मारुति सुजुकी ने कहा कि वह इन दो बायोगैस परियोजनाओं में ₹150 करोड़ का निवेश करेगी।
कंपनी ने कहा कि परियोजनाएं सरकार के ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मिशन का समर्थन करती हैं। इसमें कहा गया है कि इसने जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने के लिए बायोगैस और सौर ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने सहित अपने परिचालन में कई कदम उठाए हैं।कंपनी ने कहा, “मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2030-31 तक हरित ऊर्जा पहल के लिए ₹925 करोड़ निवेश करने की योजना बनाई है।” प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी टेकुची ने कहा कि कंपनी जीवाश्म ईंधन की खपत और तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के उपाय कर रही है।
उन्होंने कहा, “इसके अनुरूप, हम खरखौदा सुविधा में एक नया 10 टन प्रतिदिन का बायोगैस संयंत्र स्थापित कर रहे हैं और साथ ही मानेसर सुविधा में मौजूदा बायोगैस संयंत्र का विस्तार कर रहे हैं।”
ताकेउची ने कहा कि इस तरह की पहल अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा वातावरण अनिश्चित बना हुआ है।
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमारी बायोगैस परियोजना की शुरूआत उचित समय पर हुई है। यह हमें कई अन्य चल रहे प्रयासों के साथ-साथ वर्तमान राष्ट्रीय प्राथमिकता में मामूली लेकिन सार्थक तरीके से योगदान करने में सक्षम बनाता है।”
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