गायत्री जयंती 2026: गायत्री जयंती पर कैसे करें गायत्री मंत्र का जाप? जानिए विधि, नियम, अर्थ और किस विधि से

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गायत्री मंत्र का जाप कैसे करें: गायत्री जयंती 25 जून को है। इस अवसर पर गायत्री मंत्र का जाप करके शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और एकाग्रता मिलती है। गायत्री मंत्र का जाप कैसे करें? आइये जानते हैं गायत्री मंत्र जाप की विधि, नियम और अर्थ।

गायत्री जयंती: कैसे करें गायत्री मंत्र का जाप? जानिए विधि, नियम, अर्थ और उपाय ज़ूम

गायत्री मंत्र का जाप कैसे करें? (फोटो: एआई)

गायत्री मंत्र जाप विधि: इस साल गायत्री जयंती 25 जून को है। इस दिन गायत्री माता की पूजा करते हैं और गायत्री मंत्र का जाप करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को गायत्री माता का प्राकट्य हुआ था, इसलिए हर साल इस तिथि को गायत्री जयंती मनाई जाती है। गायत्री माता से ही वेद, शास्त्र, श्रुतियों की उत्पत्ति हुई है। गायत्री जयंती के अवसर पर गायत्री मंत्र का जाप कैसे करें? इसमें किस मंगल का प्रयोग किया जाता है? गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

गायत्री मंत्र का अर्थ

वह प्राणस्वरूप, दुःखनाश, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेज, पापनाशक और देवस्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सही मार्ग की ओर प्रेरित करें।

किस माला से करें गायत्री मंत्र का जाप

गाय का मंत्र जाप रुद्राक्ष या फिर चंदन की माला से करना चाहिए। रुद्राक्ष की माला से गायत्री मंत्र का जाप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सफेद या लाल चंदन की माला से जप करने से मन की शांति और एकाग्रता संतृप्त होती है। तुलसी की माला का उपयोग न करें।

गाय मंत्र जाप की सही विधि

  • गायत्री मंत्र का जाप करने से मन एकाग्र रहता है और मानसिक शांति मिलती है। इस जाप का लाभ पाने के लिए आपको इस जाप की सही विधि के बारे में जानना चाहिए।
  • गायत्री मंत्र का जाप सूर्योदय से थोड़ा पहले शुरू करना चाहिए। इस मंत्र का जाप दो में और सूर्य से थोड़ा पहले शुरू कर सकते हैं।
  • गायत्री मंत्र का जाप करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा में हो। शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वच्छ गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • कुश या ऊन के आसन का उपयोग करके गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। ये दोनों नहीं हैं तो आप ऊनी कंबल वाले आसन लगा सकते हैं।
  • एक मंगल में कम से कम 108 मनके होते हैं। आप गायत्री मंत्र का जाप 1 माला या उससे अधिक बार कर सकते हैं।
  • गायत्री मंत्र के जाप के साथ-साथ गले को दांये हाथ की मध्यमा और अनामिका उंगली में लगाने से हर मंत्र के जाप से आपके दायें हाथ की मध्यमा और अनामिका की अंगूठी में मदद मिलती है। फ़्रॉफ़नी एंजल से मंगल स्पश न हो, इसका ध्यान रखें।
  • मंत्र का उपांशु जाप करना चाहिए। आपके हाथ हिलते हैं, लेकिन आवाज बाहर नहीं आती है। अगर ऐसा नहीं है तो आप मानसिक जाप कर सकते हैं यानी अपने मन में ही मंत्र का जाप करें।
  • जाप के समय के मंत्र को किसी भी कपड़े में ढँककर रखना चाहिए, ताकि उसे कोई न देख सके।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

कार्तिकेय तिवारीउप समाचार संपादककार्तिकेय तिवारी हिंदी न्यूज़18 डिजिटल में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के पद पर हैं। इसमें वर्तमान धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरें काम करती हैं। धर्म में पंचांग, ​​पुराणों और शास्त्रों के आधार…और पढ़ें

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