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सावन में जल अभिषेक के बाद बचा जल स्थान? 99% लोग प्लास्टिक बनाते हैं, जानें सही जगह

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 1, 2026
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आखरी अपडेट:

सावन एस्ट्रो टिप्स: सावन का मूल्य भगवान शिव के सबसे करीब है। जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा पर अविश्वासी शिवलिंग बनाते हैं। बार-बार जल अभिषेक के बाद बचा पात्र में जल बचाया जाता है। कई लोग गलतियां भी कर देते हैं, जो आपको नहीं करना है. स्थानीय 18 से धार्मिक विद्वानों और वास्तु शास्त्र के अनुसार कई लोग इसे सामान्य पानी की तरह जगह भी देते हैं, जबकि धार्मिक विद्वानों और वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं है। इस पवित्र जल को शौचालय, शौचालय या किसी भी गंदे स्थान पर बिल्कुल नहीं रखना चाहिए।

अधिकार. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने लाखों भगवान शिव पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है। पूजा के दौरान अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि जल अभिषेक के बाद जल कहां रखा जाए। कई लोग इसे सामान्य पानी की तरह भी कचरा देते हैं, जबकि धार्मिक विद्वानों और वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा नहीं माना जाता है। माना जाता है कि पूजा में जल का प्रयोग पवित्र हो जाता है, इसलिए उसका सम्मान विसर्जित कर देना चाहिए।

न करें ये काम

स्थानीय 18 से वृक्षों के ज्योतिषी अलोकतांत्रिक पंडितों के अनुसार, जलाभिषेक के बाद बचाए गए जल में साफ-सुथरे के उपाय, तुलसी के उपाय या ऐसे वृक्षों के वृक्षों में पवित्रता जा सकती है, जिन्हें नियमित रूप से पानी दिया जाता है। ऐसा करना प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यदि आपके घर में बगीचा है तो वहां भी इस जल का उपयोग किया जा सकता है। इस पवित्र जल को नाली, शौचालय या किसी भी गंदे स्थान पर नहीं रखना चाहिए।

या नदी तालाब न मिले तब?

ज्योतिष शास्त्र के विद्वान पंडितों का मानना ​​है कि यदि जलाभिषेक गंगाजल से किया गया है तो उसे किसी भी प्रकार के स्वच्छ जल स्रोत में प्रवाहित करना भी शुभ होता है। यदि नदी या तालाब में जल प्रवाहित करना संभव नहीं है, तो घर के किसी भी सुरक्षित उपाय में बचाव करना बेहतर विकल्प है। सावन के दौरान वास्तु शास्त्र घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने पर भी विशेष जोर देता है। इस महीने घर के मंदिर की नियमित सफाई करें और पूजा स्थान को हमेशा स्वच्छ रखें। पूजा के लिए उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो शिवलिंग या भगवान शिव के परिवार की तस्वीरें इसी दिशा में स्थापित करें। सिद्धांत यह है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति बनी रहती है।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

प्रियांशु गुप्ता

प्रियांशु गुगुप्ता डेप्स 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से पत्रकारिता का इतिहास सीखें (प्रिंट, ऑफिस) से अपने इतिहास की शुरुआत की। य…और पढ़ें

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