हालाँकि यह कोई अंतिम भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि अंक ज्योतिष पर आधारित एक गणना है। अगर सही तरीके से इस विधि को शामिल किया जाए तो इस बात का संकेत दिया जा सकता है कि किस वर्ष विवाह के योग मजबूत बन सकते हैं। आइये जानते हैं इन आसान ज्योतिषीय तरीकों के बारे में।
अंक ज्योतिष में क्यों महत्वपूर्ण है जन्मतिथि?
अंक ज्योतिष के अनुसार हर अंक किसी न किसी ग्रह की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। जन्म की तारीख से मूलांक व्यक्ति के स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा को बताया जाता है, जबकि भाग्यांक जीवन में मिलने वाले अवसर और महत्वपूर्ण घटनाओं का संकेत देता है। विवाह भी प्रमुख गाथाओं में शामिल माना जाता है। ज्योतिषियों का मानना है कि जब किसी विशेष वर्ष में ऊर्जावान व्यक्ति का मूलांक और विवाह योग मेल खाता है, तब विवाह अधिक मजबूत हो सकता है।
कैसे जानें अपना मूलांक?
सबसे पहले अपनी जन्मतिथि का केवल दिन लें।
यदि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि 12 सितम्बर 1994 है तो उसका दिन 12 होगा।
अब 1+2 = 3
यानी इस उदाहरण में व्यक्ति का मूलांक 3 माना जाएगा.
यदि आपकी जन्मतिथि पहले से एक अंक है, जैसे 5 या 8, तो वही आपका मूलांक होगा।
भाग्यांक निकालने की आसान विधि
भाग्यांक निकालने के लिए संपूर्ण जन्मतिथि के सभी अंकों को शामिल करना होता है।
उदाहरण के लिए 12-09-1994
1+2+0+9+1+9+9+4 = 35
अब 3+5 = 8
ऐसे होगा इस जन्मतिथि का भाग्यांक 8.
हालाँकि विवाह वर्ष की इस विशेष गणना में मूलांक का उपयोग अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
विवाह वर्ष अन्वेष की ज्योतिषीय गणना
अंक ज्योतिष में एक आसान तरीका यह भी बताया गया है कि पहले अपने मूलांक में जन्म का समय पता करें।
यदि मूलांक 3 है और जन्म सितम्बर यानि 9वें महीने में हुआ है, तो
3 + 9 = 12
अब 1+2 = 3
यह नंबर आगे की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अब जिस वर्ष के बारे में जानना चाहते हैं, उसके सभी अंकों को इस अंक के साथ प्राप्त किया गया है।
मान लीजिए आप वर्ष 2028 की जांच करना चाहते हैं।
2+0+2+8+3 = 15
अब 1+5 = 6
अब प्राप्त अंक 6 को विवाह मूलांक लड़के में देखा जाता है। यदि यह अंक आपके मूलांक के अनुकूल माना गया है, तो उस वर्ष विवाह के योग बनने की संभावना बढ़ सकती है।
कब मजबूत माने जायेंगे विवाह के योग?
अंक ज्योतिष के अनुसार हर मूलांक के लिए कुछ विशेष अंक शुभ माने जाते हैं। जब किसी वर्ष की अंतिम गणना की जाती है, तब उस वर्ष का भिन्न तय होना, सगाई होना या विवाह होना की संभावना अधिक मानी जाती है। हालाँकि इसका अर्थ यह नहीं है कि एक ही वर्ष में विवाह निश्चित रूप से होगा। कुंडली की दशा, कुंडली के सप्तम भाव, विवाह कारक ग्रह और व्यक्ति के कर्म में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी व्यक्ति का मूलांक 3 है।
यदि वर्ष की गणना करने पर अंतिम अंक 1 आता है और विवाह मित्र का मूलांक 3 के लिए 1 शुभ अंक नहीं माना गया है, तो उस वर्ष विवाह की अनुमानित मूलांक 3 मानी जाएगी। लेकिन यदि किसी दूसरे वर्ष का अंतिम अंक 9 आता है और वह मूलांक 3 के लिए उपयुक्त अंक है, तो उस वर्ष विवाह के योग अधिक प्रबल माने जा सकते हैं। इसी कारण से कई लोग अलग-अलग रिश्तों की गणना करके विवाह-विवाह साल का अनुमान लगाते हैं।
सिर्फ अंक नहीं, पूरी कुंडली भी जरूरी
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि ज्योतिष के आधार पर केवल एक निष्कर्ष निकालना जरूरी नहीं है। यदि विवाह में लगातार देरी हो रही है या बार-बार रिश्ते में बाधा आ रही है, तो जन्म कुंडली, राशि की दशा, गोचर और सप्तम भाव का विश्लेषण भी जरूरी है। अंक ज्योतिष इस दिशा में केवल एक संकेत देता है, जबकि संपूर्ण ज्योतिष का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
यदि आप भी यह जानना चाहते हैं कि किस वर्ष विवाह के योग मजबूत हो सकते हैं, तो जन्मतिथि से मूलांक और संबंधित वर्ष का अंक निर्धारण करके एक संकेत प्राप्त कर सकते हैं। हालाँकि इस पर अंतिम भविष्यवाणी नहीं की जानी चाहिए। अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली का विस्तृत विश्लेषण जानने के लिए बेहतर परिणाम।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और शर्ते सामान्य सीटू पर आधारित हैं। हिंदी समाचार 18 उपयोगकर्ता पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)
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