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Vaibhav Sooryavanshi के बहाने चलिए भारतीय क्रिकेट इतिहास के ऐसे पन्ने को याद करते हैं, जिसे शायद बहुत कम लोग जानते हैं. बेहद कम लोगों को पता होगा कि आज वैभव सूर्यवंशी के साथ जैसा सूलुक हो रहा है. 14 साल के तेंदुलकर को 1987/88 के घरेलू सीजन के लिए मुंबई की टीम में शामिल किया गया था, लेकिन प्लेइंग इलेवन में आने के लिए उन्हें एक साल का इंतजार करना पड़ा.
सचिन तेंदुलकर को भी अपने पहले मैच के लिए लंबा इंतजार करना पड़़ा था.
नई दिल्ली: वैभव सूर्यवंशी का इंतजार बदस्तूर जारी है. टीम इंडिया में सिलेक्शन होने के बाद तीन मैच हो चुके हैं, लेकिन इन तीनों ही मुकाबलों में उन्हें मौका नहीं मिला. 15 साल के इस ‘वंडर किड’ का इंतजार जारी है. इतिहास ने इससे पहले भी ऐसी क्रूर तस्वीर देखी है, जब इस तरह किसी उभरते सितारे के बेंच पर बिठाकर सिर्फ पानी पिलाने के लिए रखा गया था. हम बात कर रहे हैं ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर की.
आज पूरी दुनिया इस बात से खफा है कि शानदार फॉर्म में चल रहे वैभव सूर्यवंशी को इंटरनेशनल डेब्यू के लिए इतना इंतजार क्यों करवाया जा रहा है. मगर बेहद कम लोग जानते हैं कि सचिन तेंदुलकर को भी अपने करियर में ऐसे दिन देखने पड़े थे. जब सिलेक्शन के बावजूद उन्हें साल भर तक नहीं खिलाय गया.
दरअसल, 80 का दशक खत्म होते-होते अखबरों में सचिन तेंदुलकर के नाम का हल्ला शुरू हो चुका था. स्कूल क्रिकेट में धूम मचाने के बाद चारों ओर सचिन तेंदुलकर की ही चर्चा थी कि मुंबई के शिवाजी पार्क से निकला कोई छोटा सा बच्चा मैदान पर गदर काट रहा है. अखबार उनके आर्टिकल और तस्वीरों से अटा पड़ा होता था.
इस माहौल में महज 14 साल के सचिन तेंदुलकर को 1987/88 के घरेलू सीजन के लिए मुंबई की टीम में शामिल किया गया. उस वक्त मुंबई क्रिकेट की तूंती बोलती थी. मुंबई की प्लेइंग इलेवन में आना भारतीय टीम के लिए खेलने से भी ज्यादा कठिन कहा जा सकता था. मुंबई की टीम में सिलेक्शन के बाद पूरे एक साल तक उन्हें बेंच पर ही बिठाकर रखा गया. एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला.
इतनी कम उम्र में किसी भी खिलाड़ी के लिए यह इंतजार आसान नहीं होता. कई युवा प्लेयर्स इस दौरान हताश हो जाते हैं, लेकिन सचिन ने खुद को टूटने नहीं दिया. उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी. नेट्स में लगातार अभ्यास करके अपने खेल को और निखारा और धैर्यपूर्वक इंतजार किया. आखिरकार 15 साल और 232 दिन की उम्र में उन्हें मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी में पहला मैच खेलने का मौका मिला.
अपने डेब्यू मैच में ही सचिन ने नाबाद शतक जड़कर इतिहास रच दिया था. मगर उनके डेब्यू की कहानी भी काफी दिलचस्प है. दरअसल, न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच की तैयारी कर रही भारतीय टीम के साथ नेट सेशन में उन्होंने कप्तान दिलीप वेंगसरकर को प्रभावित किया था. इसके बाद ही मुंबई की टीम में मौका मिला. वानखेड़े स्टेडियम में नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने उतरे सचिन ने 129 गेंदों में नाबाद 100 रन बनाए और इस दौरान 14 चौके जड़े. नंबर 4 की यही पोजिशन बाद में टेस्ट क्रिकेट में उनकी पहचान बन गई.
आज सचिन तेंदुलकर के नाम वर्ल्ड क्रिकेट के सारे बड़े रिकॉर्ड हैं. उस छोटे से बच्चे ने आगे चलकर 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए. 34 हजार से ज्यादा इंटरनेशनल रन बनाए और क्रिकेट के ‘भगवान’ कहलाए. आज वैभव सूर्यवंशी के मामले में भी कुछ वैसी ही तस्वीर दिखाई दे रही है. चयन होने के बावजूद उन्हें लगातार प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल रही है. हर कोई सवाल पूछ रहा है कि जब टैलेंट पर भरोसा किया गया है तो उसे खुद को साबित करने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा.
वैभव सूर्यवंशी को भी अपने इंतजार को तैयारियों में बदलना होगा. देर-सवेर उन्हें मौका जरूर मिलेगा. वह सचिन तेंदुलकर से भी कम उम्र में अपना इंटरनेशनल डेब्यू कर जाएंगे. ये इंतजार लंबा हो सकता है, लेकिन कई बार यही इंतजार महान कहानियों का पहला चैप्टर भी साबित होता है.
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रेटजी मेकिंग का रोल संभाल रहे अ…और पढ़ें
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