हाइलाइट
- अमावस्या तिथि पर हमारे पूर्वज पितृलोक से पृथ्वी लोक पर आते हैं।
- कहते हैं अमावस्या पर किया गया तर्पण, दान और श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है।
- इस दिन पितरों के नाम से कुछ न कुछ दान जरूर करना चाहिए। कहते हैं इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
हिंदू धर्म में पितरों को यानी हमारे मृत पूर्वजों को एक विशेष स्थान दिया गया है। कहते हैं जिस परिवार पर उनके पितरों की कृपा बरसती है, वहां सुख-समृद्धि किसी चीज की कमी नहीं होती। लेकिन अगर पितर किसी कारण रूठ जाएं, तो जीवन में तमाम परेशानियां आने लगती हैं। कुंडली में लगने वाले पितृ दोष से ये पता चलता है कि हमारे पितर हमसे नाराज हैं। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए लोग तमाम तरह के उपाय करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर महीने में आने वाली अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कहते हैं अमावस्या तिथि पर हमारे पूर्वज पितृलोक से पृथ्वी लोक पर अपने परिवार वालों से मिलने आते हैं। ऐसे में जब उनके वंशज उनके नाम से श्राद्ध या दान करते हैं तो उनकी आत्मा तृप्त होती है। कहते हैं अमावस्या पर किया गया तर्पण, दान और श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है। ऐसे में अगर आप इस दिन कुछ विशेष उपाय करते हैं तो इससे पितरों की विशेष कृपा पा सकते हैं। जिससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि की कभी नहीं होगी।
अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के बेहद सरल उपाय
1. जल से तर्पण – अमावस्या पर तर्पण करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए आप इस दिन सुबह स्नान के बाद एक तांबे के लोटे में साफ जल लें। साथ ही उसमें गंगाजल, काले तिल, दूध और कुशा डालें। फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके इस जल को हाथों से धीरे-धीरे गिराएं। कहते हैं अमावस्या पर पितरों को अर्पित किया गया यह जल सीधे पितरों तक जाता है, जिससे उनकी आत्मा तृप्त हो जाती है।
2. पंचबलि भोग – अमावस्या के दिन जो सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। सबसे पहले उसके पांच विशेष अंश निकाले जाते हैं, जिसे पंचबलि भोग के नाम से जाना जाता है।
- इसमें पहला अंश गाय के लिए
- दूसरा कुत्ते के लिए
- तीसरा कौए के लिए
- चौथा देवताओं के लिए (इसे छोटी कन्याओं को खिलाया जाता है)
- पांचवां चींटियों के लिए
3. पीपल के पेड़ की पूजा – अमावस्या के दिन पीपल पर जल चढ़ाने का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन दोपहर या शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाएं और उसकी जड़ में कच्चा दूध और जल जरूर अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के नीचे ही सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। कहते हैं अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा से पितर प्रसन्न हो जाते हैं।
4. दक्षिण दिशा में दीपक जलाना – अमावस्या की शाम में घर के मंदिर या फिर दक्षिण कोने में सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं। कहते हैं इससे पितर शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं।
5. सामर्थ्य अनुसार दान – इसके अलावा अमावस्या पर जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, काले तिल, जूते या छाते का दान करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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