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‘बोल बम’ के नारों से गूंजेंगे शिवालय; इस दिन से शुरू हो रही है कांवड़ यात्रा, जानें जलाभिषेक की शुभ तिथियां

Ajay Kumar Verma
By Ajay Kumar Verma On July 28, 2026
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सावन भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस माह में महादेव की उपासना करना अति उत्तम माना जाता है। सावन महीने में कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है। हिंदू धर्म में कावड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में कांवड़ उठाने से भोलेनाथ की अपार कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को सभी कष्ट, परेशानी से छुटकारा मिल जाता है। कांवड़ यात्रा में भक्तगण गंगजाल लेकर प्रसिद्ध शिव मंदिर जातक शिवलिंग का जलाभिषेक और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। काशी, हरिद्वार, उज्जैन से लेकर देवघर में कांवड़ यात्रा की खास रौनक देखने को मिलती है। तो चलिए जानते हैं कांवड़ यात्रा की तिथि और जलाभिषेक शुभ मुहूर्त के बारे में।

कांवड़ यात्रा 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 29 जुलाई को रात 8 बजकर 5 मिनट पर होगा। प्रतिपदा तिथि का समापन 30 जुलाई को रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, कांवड़ यात्रा का आरंभ 30 जुलाई 2026 से होगा। इसी दिन से पूरा वातावरण बोल बम के नारे से गूंज उठेगा।

आपको बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में कांवड़ यात्रा सावन कृष्ण प्रतिपदा से सावन कृष्ण चतुर्दशी तक चलती है। वहीं झारखंड के देवघर में पूरे सावन माह तक कांवड़ यात्रा चलती है। देवघर में कांवड़ यात्रा सावन पूर्णिमा (28 अगस्त) को समाप्त होगी। वहीं दिल्ली-एनसीआर में कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से लेकर 11 अगस्त 2026 (सावन शिवरात्रि) तक रहेगा।

कांवड़ यात्रा 2026 जलाभिषेक की शुभ तिथियां

  • सावन सोमवार (पहला)- 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सावन सोमवार, सोम प्रदोष व्रत- 10 अगस्त 2026
  • सावन शिवरात्रि- 11 अगस्त 2026
  • तीसरा सावन सोमवार, नाग पंचमी- 17 अगस्त 2026
  • चौथा सावन सोमवार- 24 अगस्त 2026
  • भौम प्रदोष व्रत- 25 अगस्त 2026
  • श्रावण पूर्णिमा, सावन माह का अंतिम दिन- 28 अगस्त 2026

सावन माह का महत्व

देवों के देव महादेव की पूजा के लिए सावन का महीना अति उत्तम माना जाता है। पूरे सावन माह और सोमवार के दिन व्रत करने का विधान है। मान्यता है कि सावन में व्रत करने से भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। सावन में जो भी भक्त कांवड़ यात्रा करने वाले हैं वो शिवजी का जलाभिषेक सोमवार के दिन या महादेव के प्रिय दिन करें। बता दें कि सावन सोमवार के अलावा प्रदोष व्रत, नाग पंचमी और शिवरात्रि का दिन जलाभिषेक और भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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