साल 2006 का जुलाई महीना था. कोलंबो का सिंहली स्पोर्ट्स क्लब मैदान एक ऐसी ऐतिहासिक घटना का गवाह बनने जा रहा था, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रीलंका की टीम पहली पारी में सिर्फ 14 रनों पर अपने दो शुरुआती विकेट गंवाकर संकट में थी. क्रीज पर उतरे श्रीलंका के दो सबसे भरोसेमंद स्तंभ कुमार संगकारा और माहेला जयवर्धने. इसके बाद जो हुआ, उसने क्रिकेट के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया. दोनों बल्लेबाजों ने अफ्रीकी गेंदबाजों की हर रणनीति को नाकाम करते हुए तीसरे विकेट के लिए 624 रनों की रिकॉर्ड तोड़ साझेदारी कर डाली. संगकारा ने जहां 287 रनों की शानदार पारी खेली, वहीं कप्तान जयवर्धने ने 374 रन कूट दिए. डेल स्टेन और मखाया एनटिनी जैसे दिग्गज गेंदबाज विकेट के लिए तरस गए. यह आज भी टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी विकेट के लिए की गई सबसे बड़ी साझेदारी है, जिसने श्रीलंका को एक ऐतिहासिक जीत दिलाई.
टेस्ट क्रिकेट की पांच सबसे बड़ी साझेदारी.
जयसूर्या और महानामा की मैराथन पारी
संगकारा और जयवर्धने के इस महा-रिकॉर्ड से करीब नौ साल पहले, यानी 1997 में कोलंबो के ही प्रेमदासा स्टेडियम में एक और श्रीलंकाई जोड़ी ने तबाही मचाई थी. भारत ने पहली पारी में 8 विकेट पर 537 रन बनाकर खुद को बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा कर लिया था. लेकिन श्रीलंका के इरादे कुछ और ही थे. सनथ जयसूर्या और रोशन महानामा ने दूसरे विकेट के लिए भारतीय गेंदबाजों को इस कदर थकाया कि तीन दिनों तक भारतीय टीम सिर्फ फील्डिंग ही करती रह गई. जयसूर्या ने आक्रामक अंदाज में खेलते हुए 340 रन बनाए, जबकि महानामा ने 225 रनों की धैर्यपूर्ण पारी खेली. दोनों के बीच 576 रनों की मैराथन साझेदारी हुई. श्रीलंका ने इस मैच में 6 विकेट पर 952 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो आज भी टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा टीम स्कोर है. यह साझेदारी आज भी उपमहाद्वीप के क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार यादों में से एक है.
वेलिंगटन में जोंस और क्रो की कीवी जुगलबंदी
साल 1991 के वेलिंगटन टेस्ट में न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच मुकाबला चल रहा था. पहली पारी में पिछड़ने के बाद न्यूजीलैंड की टीम दूसरी पारी में दबाव में थी. लेकिन एंड्रयू जोंस और महान बल्लेबाज मार्टिन क्रो ने मिलकर कीवी टीम की नैया को न सिर्फ पार लगाया, बल्कि एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी. दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 467 रनों की बेमिसाल साझेदारी की. जोंस ने 186 रनों का योगदान दिया, जबकि मार्टिन क्रो अपने तिहरे शतक से महज एक रन दूर 299 पर आउट हुए. इस साझेदारी ने न केवल न्यूजीलैंड को हार के संकट से निकाला, बल्कि उस समय के लिहाज से इसे दुनिया की सबसे बड़ी साझेदारियों में शुमार करा दिया.
जो रूट और हैरी ब्रुक का मुल्तान में धमाका
क्रिकेट जब मॉडर्न दौर में पहुंचा, तो रनों की गति और तेज हो गई. अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान के मुल्तान की चिलचिलाती धूप में इंग्लैंड के जो रूट और हैरी ब्रुक ने टेस्ट क्रिकेट को एक नए नजरिए से खेला. पाकिस्तान ने पहली पारी में 556 रन बनाए थे, जिसका जवाब इंग्लैंड को देना था. रूट और ब्रुक ने पाकिस्तानी गेंदबाजी आक्रमण की बखिया उधेड़ते हुए चौथे विकेट के लिए 454 रनों की हैरतअंगेज साझेदारी की. जो रूट ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ 262 रन बनाया, तो युवा सनसनी हैरी ब्रुक ने तिहरा शतक जड़ते हुए 317 रन ठोक दिए. इंग्लैंड के ‘बैजबॉल’ युग की इस बेखौफ बल्लेबाजी ने पाकिस्तान को उनके ही घर में बैकफुट पर धकेल दिया और यह आधुनिक टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी साझेदारियों में से एक बन गई.
ब्रैडमैन और पोंसफोर्ड की वो ऐतिहासिक एशेज जंग
इस लिस्ट में सबसे पुरानी और क्लासिक साझेदारी साल 1934 की है, जब ओवल के मैदान पर पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड आमने-सामने थे. एशेज सीरीज का वह निर्णायक मुकाबला था. ऑस्ट्रेलिया के बिल पोंसफोर्ड और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सर डॉन ब्रैडमैन ने मिलकर इंग्लैंड के गेंदबाजों को दिन में तारे दिखा दिए. दूसरे विकेट के लिए इन दोनों दिग्गजों ने 451 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की. पोंसफोर्ड ने 266 रन बनाए और ब्रैडमैन ने 244 रनों की आतिशी पारी खेली. उस दौर में, जब सुरक्षात्मक गियर नहीं होते थे और पिचें अनप्रेडिक्टेबल होती थीं, तब बनाई गई यह साझेदारी क्रिकेट बिरादरी में आज भी एक ऐतिहासिक पारी का दर्जा रखती है.
ये पांचों साझेदारियां सिर्फ रनों का अंबार नहीं हैं, बल्कि यह टेस्ट क्रिकेट की उस खूबसूरती को दर्शाती हैं जहां धैर्य, एकाग्रता, तकनीक और आपसी तालमेल से इतिहास रचा जाता है. इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि जब दो बल्लेबाज एक-दूसरे के पूरक बन जाएं, तो क्रिकेट की दुनिया का बड़े से बड़ा रिकॉर्ड भी छोटा नजर आने लगता है.
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